💔 देहरादून में विधवा मां की गुहार!
पर पहली बार सीधे गुंडा एक्ट में कार्रवाई
देहरादून:
भागीरथपुरम की विधवा मां विजयलक्ष्मी पंवार का जीवन दो नशेड़ी बेटों ने नर्क बना दिया।
हर रोज़ की मारपीट, पैसे की मांग और जान से मारने की धमकियों से त्रस्त होकर महिला ने सीधे जिलाधिकारी सविन बंसल के दरवाज़े दस्तक दी।
और इस बार जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक कदम उठाया—थाना, कचहरी और वकील को दरकिनार कर सीधे गुंडा एक्ट लागू कर दिया।

🔥 “मा का दर्द, कानून से बड़ा” – डीएम
डीएम ने स्पष्ट कहा—
“जब खुद मां ही अपनी सुरक्षा की गुहार लगा रही है, तब जटिल प्रक्रियाओं की परवाह क्यों की जाए? ज़रूरी है तुरंत न्याय।”
इस साहसिक कदम से यह देहरादून जिले का पहला मामला बन गया है जब डीएम कोर्ट ने खुद गुंडा रूल्स 1970 की शक्ति का इस्तेमाल किया।

🩸 नशे में डूबे बेटे, भय में जीती मां
महिला ने रोते हुए बताया—
“मेरे दोनों बेटे शुभम पंवार और उसका भाई शराब, गांजा और अफीम के नशे में मुझे दिन-रात मारते हैं। डंडों से पीटते हैं, पैसे मांगते हैं, और धमकी देते हैं कि एक दिन मुझे झोपड़े में ही जान से मार देंगे।”
स्थानीय पड़ोसियों और प्रतिनिधियों ने भी गवाही दी कि बेटे आए दिन मां को प्रताड़ित करते हैं।
⚡ फास्ट-ट्रैक न्याय: 2 दिन में फैसला
डीएम कार्यालय खुद बना न्याय का मंदिर।
22 अगस्त को मां की व्यथा सुनने के महज़ 2 घंटे के भीतर ही केस दर्ज कर लिया गया।
दोनों बेटों को नोटिस जारी कर 26 अगस्त को डीएम कोर्ट में हाज़िर होने का आदेश दिया गया है।
यदि वे स्पष्टीकरण नहीं देते तो सीधा जिला बदर (District Exile) का आदेश सुनाया जा सकता है।
🙏 जनता में भरोसा
इस मामले ने देहरादून में लोगों को संदेश दिया है कि प्रशासन पीड़ित के साथ खड़ा है।
पारंपरिक धीमी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर फास्ट-ट्रैक फैसले ही पीड़ितों को राहत दे सकते हैं।
🕯️ बंद होती पंक्ति
एक मां की आंसुओं से भरी गुहार ने सिस्टम को झकझोर दिया।
सवाल ये है—क्या अब हर बेबस मां को न्याय ऐसे ही तेज़ी से मिलेगा, या विजयलक्ष्मी की कहानी अपवाद ही रह जाएगी?
