8 लाख की ज्वैलरी बरामद, झांसी से जुड़े तार, पुलिस ने 3 को दबोचा
देहरादून में चोरी की वारदातें करने वाला एक अंतरराज्यीय गिरोह आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया है। फिल्मी स्टाइल में रैकी कर, ताले तोड़कर लाखों की ज्वैलरी उड़ाने वाला ये गिरोह झांसी, उत्तर प्रदेश से आकर देहरादून में डेरा जमाए बैठा था। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 8 लाख रुपये की ज्वैलरी और कैश बरामद हुआ है।
शहर में दहशत का माहौल
हरबर्टपुर, विकासनगर और सहसपुर जैसे इलाकों में पिछले कुछ समय से बंद घरों में चोरी की वारदातें बढ़ गई थीं। लोग डर और गुस्से में थे। कोई नहीं जानता था कि इनके पीछे कौन है। लेकिन देहरादून पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और जबरदस्त मुखबिर तंत्र की मदद से पूरे गिरोह की कमर तोड़ दी।
“हम किसी भी कीमत पर अपराधियों को बख्शेंगे नहीं। देवभूमि को सुरक्षित रखना हमारी पहली जिम्मेदारी है।”
– वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून

रात के अंधेरे में करते थे रेकी
मुख्य आरोपी स्वतंत्र शर्मा, जो कभी नेटवर्क मार्केटिंग करता था, अब चोरी के धंधे में उतर गया। पुलिस पूछताछ में उसने चौंकाने वाली बातें कबूल कीं। वो अपने साथियों आकाश और अमित के साथ दिन में बंद घरों की रेकी करता और रात को गैती और सब्बल लेकर ताले तोड़ता।
तीनों आरोपी हरबर्टपुर में किराए पर कमरा लेकर रहते थे। चोरी की ज्वैलरी और नगदी वहीं छिपा कर रखते। और फिर मौका मिलते ही झांसी जाकर माल बेच आते। पुलिस ने बताया कि ये गिरोह अन्य राज्यों में भी चोरी की वारदातें कर चुका है।
फिल्मी अंदाज़ में खुलासा
विकासनगर पुलिस ने तीनों को उस वक्त पकड़ा, जब ये झाडूवाला चौक के पास संदिग्ध हालात में घूम रहे थे। पूछताछ में उन्होंने दो वारदातें कुबूल कर लीं। पुलिस जब उनके कमरे पर पहुँची तो वहां ज्वैलरी, नकदी और चोरी का अन्य सामान बरामद हुआ।
“लोगों को चाहिए कि किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें। संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।”
– चौकी प्रभारी, हरबर्टपुर
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
- स्वतंत्र शर्मा (23), मूल निवासी झांसी, यूपी, गिरोह का सरगना
- अमित कुशवाह (19), निवासी झांसी
- आकाश विश्वकर्मा (24), निवासी झांसी
बरामदगी में शामिल हैं:
- लगभग 8 लाख रुपये की ज्वैलरी और अन्य सामान
- ₹4,500 नगद
पुलिस इनका और आपराधिक इतिहास खंगाल रही है।
सवाल खड़े कर गया ये गिरोह
देहरादून जैसे शांत शहर में बाहरी राज्यों के गिरोहों की घुसपैठ एक चेतावनी है। ये केस दिखाता है कि कैसे आर्थिक तंगी, तेज़ पैसे की चाह और संगत इंसान को अपराध की दुनिया में धकेल देती है।
देवभूमि की सुरक्षा अब और सतर्क निगाहें चाहती है। क्योंकि ये सवाल हर देहरादूनवासी के दिल में गूंज रहा है — “क्या हमारा घर सच में सुरक्षित है?”
