Caa के विरोध से हटकर है नैतिक विरोध -प्रार्थना, समूह गान, संस्कृत में प्रतिज्ञा, नैतिक विचार, प्रेरक प्रसंग एवं राष्ट्रगान सहित अन्य गतिविधियां वाद्य यंत्रों से पहुचाई अपनी बात

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परंपरागत हड़ताल धरना प्रदर्शनों से हटकर नैतिकता की लाइन चलते हुए देश के भावी शिक्षकों ने शिक्षा के साथ स्वास्थ्य की चिंता करते हुए एक अलग अंदाज में अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए एक पहल शुरू कर दी है ।उत्तराखंड द्वि वर्षीय डायट डी.एल.एड. प्रशिक्षित बेरोजगार संघ का नानुरखेड़ा में का पिछले 6 दिनों से धरना चल रहा है।

   शनिवार 29 फरवरी 2020 को नियुक्ति की मांग को लेकर 13 जनपदों से आए 500 से अधिक डायट डी.एल.एड. प्रशिक्षतों का धरना प्रदर्शन प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में जारी।

शांतिपूर्वक किंतु पूरे जोश के साथ युवा प्रशिक्षित शिक्षकों का यह प्रदर्शन विद्यालयी प्रार्थना सभा के साथ शुरू हुआ जिसमें प्रार्थना, समूह गान, संस्कृत में प्रतिज्ञा, नैतिक विचार, प्रेरक प्रसंग एवं राष्ट्रगान सहित अन्य गतिविधियां वाद्य यंत्रों के साथ की गई। साथ ही साथ नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से शिक्षा निदेशक तक अपनी बात पहुंचाई।
अल्मोड़ा जनपद के डायट प्रशिक्षतों के नेतृत्व में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत पहले पोस्टर बनाए गए जिन पर स्लोगन लिखे गए। तत्पश्चात तपोवन रोड पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया जिसके अंतर्गत बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चला रहे व्यक्तियों को क्राफ्ट वर्क द्वारा तैयार किए गए गुलाब के फूल दिए गए तथा माला पहनाई गई।
डी.एल.एड. प्रशिक्षित हिमांशु जोशी ने कहा कि विभाग कोर्ट का बहाना बनाकर बच्चों को शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित कर रही है क्योंकि RTI से प्राप्त सूचना के आधार पर प्रदेश भर में शिक्षकों के 2600 से अधिक पद रिक्त हैं जोकि RTE के मानकों का भी सरासर उल्लंघन है।
डी.एल.एड. प्रशिक्षतों ने यह भी कहा गया कि यदि जल्द नियुक्ति नहीं दी गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस मौके पर संदीप सागर, सुरेश कुमार, सोनी, आरती, रश्मि, जितेंद्र नैन्वाल, दीक्षा, पुष्पलता पांडे, निर्मला दानू, नीलम मेहता, गौरव रावत सहित समस्त डी.एल.एड. प्रशिक्षित मौजूद रहे।

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