आपदा प्रबंधन के मुख्य मंत्र को ही सरकार ने तिलांजलि दे दी, आपदा से पूर्व आपदा के समय और आपदा के बाद किए जाने वाले प्रबंध पर आपदा प्रबंधन नकारा साबित हुआ परिणाम ये हुआ की अब अपनी ही पार्टी के लोग अपने ही दल से अपनी ही सरकार पर बड़े सवाल उठाने लगे है
उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के सामने यह नाराजगी बीजेपी के ही पूर्व कार्यकर्ता ने जताई है । उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों के समाधान के बजाय नेता उन पर हंस रहे हैं । अब यह अगर सच है तो सवाल इस बात को लेकर है कि जब बड़े-बड़े नेता वहां पहुंच रहे हैं तो उनका फायदा क्या है ? जब लोगों की तकलीफों का समाधान ही नहीं होना है तो फिर नेताओं के दौरों के से होगा क्या ?
यह जरूर है कि नेताओं की नींद खुली और देर से ही सही पर वे लोगों के बीच तो गए । मगर लोगों को जो उम्मीद थी कि वे शायद कुछ राहत दे पाएंगे लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ लग नहीं रहा है
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जिन लोगों के घरों में दरार है उनका दर्द भी अपार है और अभी संकट से बाहर कैसे निकलेंगे , यह कोई नहीं बता सकता ।
हां चुनौती के इस दौर में संकट की इस घड़ी में क्या उन्हें कोई मरहम लगा सकता है यह भी एक सवाल है। सरकारी नीतियों पर सरकारी नियम कायदों पर सरकारी सिस्टम पर सरकारी तंत्र पर सरकार के लगातार किए जा रहे खोखले दावो पर सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों के बीच तकलीफ इसी बात की है कि जोशीमठ आपदा के काफी दिन बाद नेताओं की वहां भीड़ जरूर लगी लेकिन उन्होंने भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया । सरकार की अब तक न तो मुआवजा वाली पॉलिसी ही बनी और न विस्थापन के लिए कोई जगह चुनी है ऐसे में जोशीमठ का क्या होगा जोशीमठ के लोगों का क्या होगा इस सवाल का जवाब अब तक किसी के पास नहीं है यह जरूर कहा जा रहा है ध्यान सभी रख रहे हैं लेकिन यह ध्यान कैसा है जब लोगों के लिए प्लान ही अभी तक नहीं बना है और इन चुनौतियों के बीच आने वाला वक्त कैसे गुजरेगा जब कड़ाके की सर्दी पड़ रही है इस बीच बारिश और बर्फबारी का भी संकट है इस दौरान पूर्व मे जो गलतियां हुई हैं उनको सुधारा क्यों नहीं गया
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शिकायतों की लंबी लिस्ट है और सवालों की भी लंबी फेहरिस्त है लेकिन इन चुनौती वाले हालातों में आखिर सत्तापक्ष की ओर से किया क्या जा रहा है केवल दौरों और मुलाकातों के सहारे सब कुछ हो जाएगा जो नियम कायदे पॉलिसी बनानी है इनके विस्थापन के लिए वह कब तक आएगी? कब लोगों को यह दिखेगा कि हां उनके लिए कुछ किया जा रहा है। यह जरूर है मीटिंग हो रही है बातें भी हो रही है और भरोसे की दवाई भी पिलाई जा रही है, लेकिन इस दवाई का असर कब होगा लोगों को वास्तव में राहत कब मिलेगी यह बड़ा सवाल है और यही संकट भी है
