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कानपुर शेल्टर होम में किशोरियां सुरक्षित क्यों नहीं ,
महिला एवं बाल विकास मंत्री इस्तीफा दो !
लखनऊ,
महिला संगठन ऐपवा ने कानपुर शेल्टर होम मामले को लेकर प्रदेशव्यापी आक्रोश दिवस का आयोजन किया।
अंकित तिवारी
ज्ञातव्य है कि कानपुर के सरकारी शेल्टर होम में 57 लड़कियों के कोविड -19 पॉजिटिव होने की बात सामने आई है जिससे पता चलता है कि यहां लड़कियाँ अमानवीय स्थितियों में रहने के किये मजबूर हैं।
ऐपवा जिला संयोजिका मीना सिंह ने कहा है कि योगी सरकार के ही कार्यकाल में देवरिया में हुए शेल्टर होम कांड हुआ था । अगर योगी सरकार देवरिया शेल्टर होम कांड के जिम्मेदारों पर कड़ी करवाई की होती तो शायद आज कानपुर में इस तरह की घटना न होती । यह मांग की गई थी कि प्रदेश के सभी सरकारी संरक्षण गृहों की एक निश्चित समयावधि पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थितिति में मॉनिटरिंग की जाए, श्वेत पत्र जारी किया जाए, लेकिन योगी सरकार ने इन सभी बातों पर गौर करने और कोई त्वरित कार्रवाई करने की बजाय इन्हें जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जिसकी वजह से आज कानपुर के होम शेल्टर में किशोरियों के साथ यौन उत्पीड़न की खबरें आ रही हैं।

आज इस प्रदेशव्यापी आक्रोश दिवस के माध्यम से मांग की गई कि-
• कानपुर शेल्टर होम की उच्च स्तरीय स्वतंत्रऔर निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए जिससे दोषियो पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
• महिला व बाल विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग
• शेल्टर होम में बच्चियों और किशोरियों के सम्मान सुरक्षा और स्वास्थ्य की गारंटी की जाए।
• शेल्टर होम के लिए श्वेत पत्र जारी किया जाए
• निश्चित समयावधि पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में होम शेल्टर की मॉनिटरिंग को सुनिश्चित किया जाय।
आज के इस कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग है-कवयित्री विमल किशोर, कमला मगन, सलिहा, मोआज़ा, रेनू सिंह, गिरजा मानिकपुरी, कल्पना भद्रा आदि।
