“डीएम देहरादून की ताबड़तोड़ एक्शन—89 लाख से किचन-स्टोर रूम का निर्माण, 50 स्कूलों में मिलेगी एक्स्ट्रा भोजन माता, बच्चों की सेहत पर फोकस”
ओपनिंग
“‘अल्यूमीनियम की कढ़ाही में अब नहीं बनेगा मिड-डे मील!’… देहरादून में बच्चों के लिए शुरू हुई ‘किचन क्रांति’। सीएम के विजन और डीएम के मिशन ने वो कर दिखाया, जो बरसों से सिर्फ फाइलों में सिसक रहा था। अब बच्चों को मिलेगा साफ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन… और लोकल महिलाओं को भी रोजगार का बड़ा तोहफा।”

स्क्रिप्ट
✅ सीएम की प्रेरणा, डीएम का ऐक्शन
पिछले महीने हुई समीक्षा बैठक में बड़ा खुलासा हुआ। जिले के कई स्कूल ऐसे थे, जहां मिड-डे मील पकाने को ढंग की किचन तक नहीं थी। बच्चों की सेहत दांव पर लगी थी। बस, यहीं से डीएम देहरादून ने ठान लिया— “अब बदलाव होकर रहेगा।”
✅ सिर्फ 2 हफ्ते में मंजूरी
डीएम ने जिला योजना विशेष फंड की फाइल दौड़ाई। और देखिए कमाल— सिर्फ 2 हफ्तों में 89 लाख रुपए की मंजूरी निकलवा ली। ये फंड सीधे स्कूलों की किचन और स्टोर रूम के निर्माण व मरम्मत पर खर्च होगा।
डीएम बोले— “बच्चों और भोजन माताओं का स्वस्थ रहना हमारी जिम्मेदारी है। कोई समझौता नहीं होगा।”

✅ जीर्ण-शीर्ण किचन को नया जीवन
जिले के 695 जीर्ण-शीर्ण किचन की मरम्मत भी इसी फंड से कराई जाएगी। ताकि मिड-डे मील सुरक्षित और गुणवत्ता वाला रहे। अब किसी स्कूल में एल्यूमीनियम के पुराने बर्तनों में खाना पकता नजर नहीं आएगा।
✅ पहली बार 50 स्कूलों में ‘एक्स्ट्रा भोजन माता’
राज्य में पहली बार देहरादून के 50 बड़े स्कूलों में एक लोकल महिला को अतिरिक्त भोजन माता के रूप में रखा जा रहा है। ये महिलाएं मुख्य भोजन माता की हेल्प करेंगी। इससे लोकल महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा।
डीएम का संकल्प— “बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और सम्पूर्ण आहार देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसे बखूबी निभाया जाएगा।”
इमोशनल एंगल
मिड-डे मील सिर्फ एक स्कीम नहीं, गरीब बच्चों के लिए पेट की उम्मीद है। एक गरम और साफ खाना, उनके चेहरे पर वो मुस्कान लौटाता है, जो भूख छीन लेती है। अब किचन-स्टोर रूम के सुधरने से बच्चों की सेहत, पढ़ाई और भविष्य तीनों सुरक्षित होंगे।
क्लोजिंग लाइन
“क्योंकि बच्चों का भविष्य किसी फंड की फाइल में नहीं, बल्कि उनके थाली के हर दाने में बसता है… और देहरादून प्रशासन ने साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों, तो बदलाव सिर्फ एक सपना नहीं, हकीकत बन जाता है।”
