मुख्यमंत्री के संकल्प को दर्शाता जिला प्रशासन का सख्त रुख
सड़क सुरक्षा में बाधक 6 शराब की दुकानों के लाइसेंस निलंबित
हाईकोर्ट में अपील खारिज, आबकारी आयुक्त ने भी डीएम के फैसले पर लगाई मुहर
देहरादून, 10 जून 2025 | Meru Raibar Desk
जनसुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए शहर में यातायात और सड़क सुरक्षा में बाधक बन चुकी 6 शराब की दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। ये कार्रवाई मुख्यमंत्री के ‘सुरक्षित जन के संकल्प’ की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है, जिसे जिलाधिकारी सविन बंसल ने कठोर और न्यायसंगत रूप से लागू किया है।
प्रशासन की इस सख्ती के खिलाफ अनुज्ञापियों द्वारा दाखिल की गई रिट याचिकाएं माननीय उच्च न्यायालय ने खारिज कर दीं, और आबकारी आयुक्त ने भी डीएम के निर्णय से सहमति जताई है।
कौन-कौन सी दुकानें हुईं बंद?
जिन दुकानों को प्रशासन ने बंद किया है, वे प्रमुख यातायात मार्गों पर स्थित थीं और बार-बार सड़क हादसों व ट्रैफिक जाम की वजह बन रही थीं:
- जीएमएस रोड – विदेशी शराब दुकान
- बिंदालपुल – चकराता रोड (2 विदेशी दुकानें)
- डालनवाला – परेड ग्राउंड के पास
- अधोईवाला – चूना भट्ठा (देशी और विदेशी दोनों दुकानें)
- करनपुर – परेड ग्राउंड के निकट देशी शराब दुकान
सड़क सुरक्षा समिति के निर्णय को सर्वोच्च मान्यता
इस निर्णय की पृष्ठभूमि में 27 मार्च 2025 को हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक रही, जिसकी अध्यक्षता स्वयं जिलाधिकारी ने की। बैठक में एसएसपी व ट्रैफिक एसपी ने इन दुकानों को सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताया था। इसके बाद डीएम ने इन दुकानों को 1 सप्ताह में स्थानांतरित करने का आदेश दिया, जिसकी अवहेलना करने पर ये सख्त कदम उठाया गया।
सुप्रीम कोर्ट से मिले अधिकारों का प्रभावी उपयोग
सशक्त जिला सड़क सुरक्षा समिति को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदान किए गए अधिकारों के तहत जनहित में लगातार निर्णय लिए जा रहे हैं। यह समिति अब तक शहर की कई संवेदनशील लोकेशनों पर ट्रैफिक और जनसुरक्षा को बाधित करने वाले अतिक्रमणों और संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।
डीएम का स्पष्ट संदेश
“जनजीवन और जनसुरक्षा में कोई भी बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी,” यह स्पष्ट करते हुए डीएम सविन बंसल ने संकेत दिया कि आगे भी अगर कोई संस्थान सड़क सुरक्षा के मानकों के विरुद्ध पाया गया, तो उसके खिलाफ इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
Meru Raibar की राय:
यह कदम प्रशासन की सक्रिय, जिम्मेदार और संवेदनशील प्रशासनिक सोच को दर्शाता है। न केवल यह निर्णय कानून व्यवस्था की मजबूती की ओर इशारा करता है, बल्कि आम जनमानस के हित में भी है। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसे फैसले राज्य के अन्य जिलों में भी मिसाल बनेंगे।
रिपोर्ट: Girish Gairola
प्रकाशन: Meru Raibar Print Media
