मैड ने 6 हजार दैनिक श्रमिकों के परिवारों तक पहुंचायी राहत सामग्री

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देहरादून। देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन, मेकिंग अ डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) संस्था की ओर से कोरोना वायरस की वजह से हुई लॉक से परेशान 6 हजार दैनिक श्रमिकों के परिवारों तक आटा, दाल,चावल, मसाले,आलू नमक तेल इत्यादि जैसी बुनियादी जरूरतों को पहुंचाया जा चुका है और संस्था का अभियान ऐसे ही आगे जारी रखा जा रहा है। गौरतलब है कि पूर्व में भी जब कोई त्रासदी हुई है, उदाहरण के तौर पर उत्तराखंड में आयी 2013 की भीषण आपदा, नेपाल में आया भूकंप, जम्मू कश्मीर, केरल, चेन्नई में आई बाढ़ इन सभी हालातों पर  मैप द्वारा अपने पॉकेट मनी  संसाधनों को एकत्र कर राहत का अभियान  चलाया गया है। वर्तमान में हुए लॉकडाउन की स्थिति भिन्न इसलिए भी हो जाती है क्योंकि यहां राहत का भी कोई भी प्रयास सामाजिक दूरी और साफ-सफाई का खास ख्याल रखते हुए करा जा रहा है। एक जरूरी अंग जो मैड ने अपने अभियान में शामिल किया है वह स्वयं द्वारा या अपने माता-पिता द्वारा बनाए गए कपड़ों के बैग में यह सारा राहत सामग्री पहुंचाने का है। मैड के पर्यावरण विज्ञान पढ़ रहे छात्रों द्वारा ही आकलन लगाया गया कि वर्तमान में जो राशन या बना हुआ खाना दैनिक श्रमिकों तक पहुंचाया जा रहा है, क्योंकि दैनिक श्रमिक अधिकांश संख्या में रिस्पना और बिंदाल तल पर ही अपना निवास कर रहे हैं, इसलिए लगभग एक लाख पॉलीबैग रिस्पना में और इतने ही बिंदाल में रोजाना अर्पित हो रहे हैं । अपनी ओर से अपने प्रयासों को स्फूर्ति देने और साथ ही साथ पर्यावरण का ख्याल रखते हुए ऐसा करने की चेष्टा में मैड पुराने कपड़ों को एकत्र कर अपने कुछ उन सदस्यों में बांटा जो खुद और जिनके माता-पिता घर बैठे हुए इनके ऐसे थैले विकसित कर सकते हैं जिनमें राशन सामग्री डालकर वितरित की जा सके। ऐसा करने में संस्था को सफलता हाथ लगी। सांस्था के इन प्रयासों में मैड के कई सदस्य जैसे श्रेया रोहिल्ला, सुभवी व खुशाली गुप्ता, शरद माहेश्वरी, आर्ची बिष्ट एवं करन कपूर के परिवार सदस्यों ने अहम् भूमिका निभाई। 2011 में जब संस्था की शुरुआत हुई थी तब सभी सदस्य छात्र थे और अपने जेब खर्च के संसाधन से संस्था का संचालन करते थे। 2020 तक आते आते संस्था के कई सदस्य जो उस समय टीन एजर्स थे वह अब ऐसी भूमिका में पहुंच गए जब वह अपना खुद की कमाई कर रहे हैं। उनके द्वारा जो सामूहिक कॉन्ट्रिब्यूशन हुआ। उससे मैड की ओर से भारी मात्रा में राशन को खरीदा जा सका। कुछ हफ्तों बाद जब वह भी खत्म होने लगा तो मैड द्वारा एक अलग तरीके का निजात किया गया। 

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