उत्तराखण्ड एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, श्रीनगर से साइबर ठगी गिरोह के दो शातिर गिरफ्तार

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देहरादून। उत्तराखण्ड एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए श्रीनगर (बडगाम) से साइबर ठगी गिरोह के दो शातिर गिरफ्तार किए हैं। गिरफ्तारी के दौरान स्थानीय भीड़ द्वारा थाना से न्यायालय तक दबाव बनाने का प्रयास किया गया, इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टीम ने सफल कार्रवाई की। संवेदनशील क्षेत्र व पूर्व ग्रेनेड हमलों के बावजूद उत्तराखण्ड एसटीएफ साइबर क्राइम ने प्रभावी पैरवी कर अभियुक्तों का रिमांड प्राप्त किया। बड़गाम से 03 मोबाइल फोन, कई एटीएम कार्ड, आधार-पैन सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के मार्गदर्शन में, साइबर पुलिस निरंतर लोगों के पैसे बचाने, जागरूकता अभियान चलाने और देश भर से गिरफ्तारियां करने में सक्रिय है। साथ ही, साइबर अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर साइबर पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम भी प्रभावी रूप से किया जा रहा है। अभियोगों की समीक्षा एडीजी लॉ एवं आर्डर डॉ. वी. मुरुगेसन तथा आईजी एस0टी0एफ/साइबर डॉ. नीलेश आनंद भरने द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाती है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ अजय सिंह द्वारा जानकारी दी गई कि एक प्रकरण देहरादून निवासी 71 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक द्वारा साइबर ठगी के संबंध में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि दिनांक 21 नवम्बर 2025 को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उनके मोबाइल पर कॉल कर स्वयं को टेलीकम्युनिकेशन विभाग का अधिकारी बताया गया तथा उनके विरुद्ध दिल्ली पुलिस में धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने की जानकारी देकर भयभीत किया गया।अभियुक्तों द्वारा शिकायतकर्ता को अन्य मोबाइल नंबर पर संपर्क करने हेतु कहा गया, जहां स्वयं को सीबीआई/दिल्ली पुलिस अधिकारी बताते हुए उनके नाम से दिल्ली स्थित बैंक खाते के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग होने की झूठी जानकारी दी गई। इसके बाद व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस अधिकारी की वर्दी में फर्जी दस्तावेज एवं गैर-जमानती वारंट दिखाकर शिकायतकर्ता को डराया गया तथा बैंक खातों के सत्यापन के नाम पर धनराशि विभिन्न खातों करीब 65,00,000 की धनराशि में स्थानांतरित कराई गई। कुछ समय पश्चात शिकायतकर्ता को स्वयं के साथ साइबर ठगी होने का आभास हुआ, जिस पर शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दर्ज करायी गयी।
प्रकरण की गम्भीरता के दृष्टिगत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एस0टी0एफ0 उत्तराखण्ड के दिशा निर्देशन में  मामले का प्रवेक्षण  अपर पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार,  पुलिस उपाधीक्षक, आर0बी चमोला एवं विवेचना देवेंद्र नबियाल निरीक्षक, साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन, देहरादून के सुपुर्द कर अभियोग के शीघ्र अनावरण हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। साईबर क्राईम पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त बैंक खातों/रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बरों/व्हाट्सअप की जानकारी हेतु सम्बन्धित बैंकों, सर्विस प्रदाता कम्पनियों, मेटा कम्पनी से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया। प्राप्त डेटा के विश्लेषण से जानकारी मे आया कि साईबर अपराध अभियुक्त को चिन्ह्ति करते हुये अभियुक्त की तलाश जारी की। साईबर टीम द्वारा विधिक प्रावधानों के अन्तर्गत प्रकाश में आये अभियुक्तो 1- शौकत हुसैन मलिक पुत्र अली मोहम्मद मलिक निवासी पारिसाबाद थाना बड़गाम, जिला बड़गाम, थाना-बड़गाम, जम्बूकश्मीर, 2-बिलाल अहमद पुत्र अली मौहम्मद मल्ला निवासी ग्राम करीपोरा, थाना बड़गाम, जिला बडगाम, जम्मू एण्ड कश्मीर के रूप में की गई जो फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल षड्यंत्रपूर्वक बैंक खाते उपलब्ध कराकर संगठित तरीके से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। इसी क्रम में गिरफ्तारी के दौरान साइबर क्राइम पुलिस टीम को स्थानीय स्तर पर विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। गिरफ्तारी के उपरांत स्थानीय व्यक्तियों द्वारा बड़ी संख्या में थाना परिसर से लेकर न्यायालय परिसर तक एकत्र होकर पुलिस टीम पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद पुलिस टीम द्वारा धैर्य एवं संयम बनाए रखते हुए आरोपी अभियुक्तो शौकत हुसैन मलिक पुत्र अली मोहम्मद मलिक व बिलाल अहमद पुत्र अली मौहम्मद,को थाना बड़गाम, जिला बडगाम, जम्मू एण्ड कश्मीर से गिरफ्तार किया गया व माननीय न्यायालय में भी विवेचक द्वारा प्रभावी ढंग से पक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अभियुक्तों का पुलिस रिमांड प्राप्त किया गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी उक्त क्षेत्र के स्थानीय थाने पर ग्रेनेड से हमले की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसके दृष्टिगत अभियान अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
अपराध का तरीका-अज्ञात साइबर ठगों द्वारा बैंक खाते उपलब्ध कराकर संगठित तरीके से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। विवेचना के दौरान बैंक खाते संख्या  एवं उससे लिंक मोबाइल नंबर के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन की जानकारी प्राप्त हुई। तकनीकी विश्लेषण में पाया गया कि अभियुक्त फर्जी बैंक खातों, मोबाइल सिम एवं एटीएम कार्ड का उपयोग कर साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर निकालते थे।अभियुक्तों द्वारा अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को उक्त खातों में जमा कर एटीएम कार्ड एवं मोबाइल फोन के माध्यम से निकासी की जाती थी। जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित बैंक खाते के विरुद्ध उत्तराखण्ड सहित देश के 07 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं।इस प्रकार अभियुक्त संगठित गिरोह बनाकर डिजिटल अरेस्ट एवं अन्य साइबर अपराधों के माध्यम से देशभर में लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। प्रारम्भिक पूछताछ में अभियुक्त ने साईबर अपराध हेतु जिस बैंक खातों का प्रयोग किया गया है उसमें मात्र कुछ माह में ही लाखों रूपयों का लेन-देन होना प्रकाश में आया है ।जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित बैंक खाते के विरुद्ध उत्तराखण्ड सहित देश के 07 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं । जिसके सम्बन्ध में जानकारी हेतु अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क किया जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस0टी0एफ0 अजय सिंह द्वारा जनता से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट एक स्कैम है जो वर्तमान में पूरे भारत वर्ष में चल रहा है, कोई भी सी0बी0आई0 अफसर, मुम्बई क्राईम ब्रान्च, साइबर क्राइम, अफसर या कोई भी एजेंसी आपको व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट करने हेतु नोटिस प्रेषित नहीं करती है। साथ ही कोई व्यक्ति आपको फर्जी दस्तावेज, अवैध सामग्री आदि के नाम पर आपको डरा धमका रहा है या पैसों की मांग कर रहा है तो इस सम्बन्ध में साइबर थानों में अतिशीघ्र अपनी शिकायत दर्ज करायें। उक्त सम्बन्ध में ज्यादा से ज्यादा जागरुक हों। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार के लोक लुभावने अवसरों/फर्जी साइट/धनराशि दोगुना करने व टिकट बुक करने वाले अंनजान अवसरो के प्रलोभन में न आयें। किसी भी प्रकार के ऑनलाईन कम्पनी की फ्रैन्चाईजी लेने, यात्रा टिकट आदि को बुक कराने से पूर्व उक्त साईट का स्थानीय बैंक, सम्बन्धित कम्पनी आदि से पूर्ण वैरीफिकेशन व भली-भाँति जांच पड़ताल अवश्य करा लें तथा गूगल से किसी भी कस्टमर केयर का नम्बर सर्च न करें व शक होने पर तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन से सम्पर्क करें। अगर आपको ऐसी ही कोई कॉल या मैसेज आए तो इसकी शिकायत जरूर करें। सरकार ने साइबर और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए संचार साथी वेबसाइट पर चाक्षु पोर्टल लॉन्च किया है।

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