🚨 सरेराह दरिंदगी, फिर कानून का शिकंजा
देहरादून की एक रात… और एक सवाल:
क्या आज भी बेटियां अपने ही शहर में सुरक्षित हैं?
रात का वक्त था।
ओल्ड डालनवाला रोड की सड़कें अपेक्षाकृत शांत थीं।
एक युवती अपने रास्ते जा रही थी…
लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि कुछ कदम पीछे डर उसका पीछा कर रहा है।
अचानक एहसास हुआ —
कोई है, जो लगातार पीछे चल रहा है।
कदम तेज किए… पर वो भी तेज हो गया।
नज़रें झुकाईं… मगर अश्लील इशारे बंद नहीं हुए।
👉 यह सिर्फ पीछा नहीं था,
👉 यह एक महिला की गरिमा पर हमला था।
🔴 हिम्मत की जीत: युवती ने तोड़ी चुप्पी
अक्सर ऐसी घटनाओं के बाद
डर, शर्म और समाज का दबाव
महिलाओं को खामोश कर देता है।
लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
18 जनवरी 2026 को
पीड़िता सीधे पहुँची कोतवाली डालनवाला
और पूरी घटना को लिखित रूप में पुलिस के सामने रखा।
“मैं डर गई थी… लेकिन चुप रहना और भी बड़ा डर था,”
— पीड़िता के करीबी सूत्रों के अनुसार
⚖️ कानून तुरंत हरकत में आया
शिकायत मिलते ही
डालनवाला पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की
धारा 74, 75(2), 78(2), 79 और 296(ए)
के तहत मामला दर्ज किया गया।
यह साफ संकेत था —
👉 यह कोई मामूली छेड़छाड़ नहीं, गंभीर अपराध है।
👮 SSP का सख्त संदेश: कोई ढिलाई नहीं
घटना की जानकारी मिलते ही
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून
ने साफ निर्देश दिए:
“महिला अपराध में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आरोपी को हर हाल में पकड़ा जाए।”
इसके बाद शुरू हुआ
तकनीक बनाम अपराधी का खेल।
🎥 CCTV बना सबसे बड़ा गवाह
पुलिस टीम ने
घटनास्थल और आसपास के सभी रास्तों के
सीसीटीवी कैमरे खंगाले।
घंटों की फुटेज,
एक-एक फ्रेम की जांच,
और आखिरकार —
संदिग्ध की पहचान हो गई।
फुटेज में दिखा वही युवक,
जिसका जिक्र पीड़िता ने अपनी शिकायत में किया था।
🚔 48 घंटे के भीतर गिरफ्तारी
सबूत पुख्ता थे।
पुलिस ने देर नहीं की।
करनजीत सिंह, उम्र 25 वर्ष,
निवासी — ओल्ड डालनवाला, करनपुर, देहरादून,
को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
👉 एक बार फिर साबित हुआ —
जब पीड़िता बोलती है, तो कानून चलता है।
🗣️ स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इलाके में इस घटना को लेकर
गुस्सा भी है और राहत भी।
एक स्थानीय निवासी ने कहा:
“ऐसे लोग अगर खुले घूमते रहें तो
हमारी बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी?
पुलिस ने सही समय पर सही काम किया।”
❗ यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं
यह केस
उन सैकड़ों घटनाओं की याद दिलाता है
जो कभी दर्ज ही नहीं होतीं।
👉 कितनी महिलाएं डर के कारण चुप रह जाती हैं?
👉 कितनी बार अपराधी बच निकलते हैं?
इस बार फर्क सिर्फ इतना था —
एक लड़की ने हिम्मत की।
🚨 देहरादून पुलिस की अपील
पुलिस ने साफ कहा है:
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें
- महिला अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति
- शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय
🧠 सोचने वाली बात
आज आरोपी गिरफ्त में है।
लेकिन सवाल अब भी जिंदा है —
👉 क्या डर हमेशा महिला के हिस्से आएगा?
👉 या समाज और सिस्टम मिलकर उसे खत्म करेंगे?
✍️ अंत में एक सवाल, एक अपील
अगर आज आप सुरक्षित हैं,
तो यह मत सोचिए कि कल भी ऐसा ही होगा।
और अगर आप असुरक्षित हैं —
तो याद रखिए,
चुप्पी अपराधी को ताकत देती है,
आवाज़ कानून को।
देहरादून की इस घटना ने
एक बार फिर साबित किया है —
हिम्मत की जीत होती है।
