सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम’ भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ः स्वामी चिदानन्द सरस्वती

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ऋषिकेश। अन्तर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, दिवस के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम’, भारतीय अर्थव्यवस्था रीढ़ हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर लॉकडाउन का गहरा प्रभाव पड़ा है। कोविड-19 के कारण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की स्थिति चुनौतीपूर्ण है, इससे निपटने हेतु सभी को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।भारत के विभिन्न भागों में स्थित अनेक एमएसएमई लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते थे लेकिन कोविड – 19 के कारण इस क्षेत्र में संकट उत्पन्न हो गया है। इस क्षेत्र में आय में गिरावट के साथ ये उद्योग अन्य कई समस्याओं से जूझ रहे हैं अब लॉकडाउन के बाद तो कई उद्यमों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। अभी तीन महीने से अधिक समय तक कारोबार बंद होने की स्थिति में भी उद्यम को बचाए रखना चुनौतीपूर्ण है। इसमें सबसे बड़ी समस्या अधिकांश श्रमिकों के पलायन के कारण उत्पन्न हुई। अब इन उद्योगों को पुनः शुरू कर पाना एक बड़ी चुनौती होगी। सरकार कर में कटौती, रिफंड प्रक्रिया में तेजी के साथ विभिन्न योजनाओं (जैसे- पीएम किसान, जन धन योजना आदि) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सहायता पहुँचाने हेतु प्रयासरत है। सरकार प्रयास कर रही है कि समाज के विभिन्न वर्गों को रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर कर खुशहाल जीवन जीने के अवसर प्रदान किये जायें ताकि लोगों का जीवन वापस सामान्य हो सके।स्वामी जी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिये स्थानीय रोजगार से स्थानीय लोगों को जोड़ना होगा। इससे पलायन रूकेगा और स्थानीय कला एवं संस्कृति, पर्यटन, योग, आयुर्वेद, स्वास्थ्य पर्यटन, हस्तशिल्प आदि को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय वस्तुओं और संस्कृति की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी होगी। स्वामी जी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर बनाये जाने वाले कागज के थैले, बाँस की टोकरियाँ, सेव, खुर्मानी, अखरोट के अनेकों उत्पाद, बुरांश का जूस, गुड़, अचार, पापड़, जैम एवं मसाले आदि को भी इस उद्योग से जोड़कर एक विशेष पहचान देनी होगी इससे ही गांधी जी के “गाँव में बसने वाले भारत” का निर्माण होगा।स्वामी जी ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि अब युवा आत्मनिर्भरता का बूस्टर डोज लेकर आयें, ताकि एक नयी दिशा और नये भारत की ओर बढ़ सकंे। गांव का युवा गांव में रूक कर गावं को सजाये। सरकार ने लगभग 10 करोड़ लोगों के लिये 50000रू प्रति व्यक्ति बिना लोन के राशि देने का जो निर्णय किया है उसका हर उद्योगी व्यक्ति को लाभ उठाना चाहिये। 

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