ढाढ़ेरी की मिट्टी में फंसे क़दम… प्रशासन की दौड़ तेज़
हरिद्वार की गर्म दोपहर… कीचड़ से सने रास्ते… और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित अपनी पैंट मोड़कर एक किलोमीटर पैदल चलते नज़र आए। मंज़िल थी सोलानी नदी का वो तटबन्ध, जो आज गाँववालों की नींद उड़ा रहा है।
ढाढ़ेरी गाँव में मंगलवार को नज़ारा कुछ और ही था। जिलाधिकारी खुद अपनी टीम के साथ ऊबड़-खाबड़, काँटेदार झाड़ियों से भरे रास्ते पर चल पड़े।
“तटबन्ध को बचाना हमारी प्राथमिकता है। खतरा बड़ा है, लेकिन हम तैयार हैं,” डीएम मयूर दीक्षित की आवाज़ में फौलादी संकल्प था।

तटबन्ध पर पहुँचते ही जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अफसरों की तरफ सख्त निगाहों से देखा।
“तुरंत स्टीमेट बनाओ… और काम शुरू करो। एक दिन की भी देरी बर्बादी है,” डीएम का आदेश साफ था।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता ओम जी गुप्ता ने बताया —
“नदी का ढाल कम है। बहाव तेज़ है। पानी तटबन्ध को काटकर गाँवों के लिए खतरा बन सकता है।”
उनकी आँखों में चिंता थी। गाँववालों की आँखों में डर।
गाँव के प्रधान राजपाल सिंह ने भी बोला —
“अगर तटबन्ध टूटा, तो ढाढ़ेरी और कुंआखेड़ा दोनों गाँव डूब जाएंगे। खेत-खलिहान, सब खत्म हो जाएगा साहब!”
उनके शब्दों में कंपकंपी थी। उनके पीछे खड़े शिव कुमार, नकली सिंह, चरण सिंह जैसे ग्रामीणों की आँखों में एक ही सवाल था — “हमारी ज़िंदगी का क्या होगा?”
सोलानी नदी का पानी इस समय तो शांत दिखता है, पर गाँववालों को मालूम है — बरसात आएगी, तो उसका रौद्र रूप सब कुछ बहा सकता है।
जिलाधिकारी ने वहीं खड़े-खड़े कहा —
“हम खतरे को नगण्य करेंगे। तटबन्ध टूटने नहीं देंगे। प्रशासन पूरी ताक़त लगाएगा।”
उधर, सीओ लक्सर नताशा सिंह, एसडीएम सौरभ असवाल और अफसरों की टीम कागज़-पेन लिए फील्ड नोट्स ले रही थी। पर गाँववालों को सिर्फ काम चाहिए — “कागजों पर नहीं, ज़मीन पर।”
ढाढ़ेरी के लोग अब आसमान की तरफ देख रहे हैं — बारिश रुके, या कम से कम तटबन्ध बचा रहे।
क्योंकि अगर सोलानी का पानी फिर उफना… तो सिर्फ तटबन्ध नहीं टूटेगा, कई घरों के सपने भी बह जाएंगे।
क्या प्रशासन वक्त रहते सोलानी के गुस्से को थाम पाएगा? या फिर कीचड़ में फंसी उम्मीदें भी बह जाएंगी?
वक़्त की रेत तेज़ी से फिसल रही है… फैसला जल्द होना होगा।
