रुद्रप्रयाग 5 जून 2025:
उत्तराखंड के दुर्गम ऊखीमठ ब्लॉक के सारी गांव की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, इन महिलाओं ने जुट बैग निर्माण के माध्यम से अपने जीवन में नया उजाला फैलाया है।
स्वयं सहायता समूह ‘जीवन ज्योति’ का गठन:
ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (REAP) और उत्तराखंड सरकार की योजनाओं के सहयोग से, इन महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट उत्पादों जैसे बैग, पर्स और सजावटी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद, ‘जीवन ज्योति संकुल स्तरीय देंण्डा’ नामक स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया, जिसने स्थानीय स्तर पर उत्पाद निर्माण और विपणन का कार्य शुरू किया।

स्थानीय संस्कृति का समावेश:
इन महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों में स्थानीय मंदिरों, प्राकृतिक दृश्यों और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का सुंदर चित्रण किया जाता है। यह न केवल उत्पादों को एक अनोखी पहचान देता है, बल्कि पर्यटकों और स्थानीय ग्राहकों के बीच इनकी मांग भी बढ़ाता है।
विपणन और आय में वृद्धि:
सरकार और REAP परियोजना द्वारा इन महिलाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, हिलांस स्टोर और स्थानीय बाजारों तक विपणन सुविधा प्रदान की गई है। इससे न केवल उत्पादों की बिक्री में वृद्धि हुई है, बल्कि महिलाओं की आमदनी भी बेहतर हो रही है।
रोजगार और सामाजिक परिवर्तन:
इस पहल से न केवल महिलाओं को रोजगार मिला है, बल्कि गांव में सामाजिक परिवर्तन भी देखने को मिला है। महिलाएं अब आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और अपने परिवारों की आय में योगदान दे रही हैं।
Meru Raibar के लिए विशेष रिपोर्ट
