पौड़ी जिला चौबट्टाखाल विधानसभा के सतपुली में संचालित चौहान स्टोन क्रेशर प्लांट को लगे हुए लगभग 10 साल पूरे हो गये है लेकिन इन 10 सालो से ये प्लान्ट नियमो को ताक पर रखकर जमकर रेत, बजरी कूट रहा है , हैरानी की बात ये है कि अभीतक इस क्रेशर पर किसी भी राजस्व कर्मी की नजर नहीं पड़ी और न कोई कार्यवाही हो पायी है।
बुद्धवार को सतपुलि उपजिलाधिकारी संदीप कुमार, पटवारी, और तहसीलदार को लेकर अचानक इस प्लान्ट पर पहुचे । उन्होने प्लान्ट के सभी दस्दावेज खंगाले साथ ही प्लान्ट का निरिक्षण कर भंडारण की भी भी नाप-छांप की। एसडीएम की जांच मे पाया गया की क्रेशर संचालक मानकों की धज्जिया उड़ा रहा था ।
चलिए पहले हम आपको स्टोन क्रेशर नीति में क्या नियम लिखे है बताते है
- स्टोन क्रेशर प्लान्ट/स्क्रीनिंग प्लान्ट इकाई के चारो तरफ चारदीवारी का निर्माण कराया जाना आवश्यक होता है
- स्टोन क्रेषर/स्क्रीनिंग प्लान्ट के अन्दर के सभी मार्ग पक्के करने होते है ।
- प्लान्ट के सम्पूर्ण क्षेत्र से धूल हटाने की व्यवस्था तथा भूमि पर पानी का नियमित छिड़काव करने की व्यवस्था की जानी आवश्यक होती है ।
- प्लान्ट के चारो तरफ धूल के कणों को रोकने वाली प्रजातियों के पेड़ो की सघन हरित पट्टी जो न्यूनतम तीन परतो में हो उसका विकास कर उनको संरक्षित करना होता है , ये कार्यवाही अनुज्ञा प्राप्त करने के साथ ही प्रारम्भ करनी होती है और प्लांट चालू करने के 6 माह के भीतर पूर्ण की जाती है ।
- प्लांट पर कोई भी अतिरिक्त भंडारण नहीं किया जा सकता है
क्रेशर नीति के अनुसार सभी नियमो को स्वीकृति के कुछ माह के अन्दर पूरा करना होता है अन्यथा प्लान्ट को निरस्त किया जा सकता है । तस्वीरे गवाह हैं कि मौके पर इनमें से कोई भी मानक पूरा नहीं दिख रहा है । अब इसे दबंगों की दादागिरी समझे या फिर शासन प्रसाशन की मिलीभगत ।
जाहिर है कि क्रेशर को लगे लगभग 10 वर्ष पूरे हो गये है लेकिन आजतक इसपर इतनी मेहरबानी क्यों बनी रही
बता दे कि ये प्लांट सड़क से लगा हुआ है बगल वाली सड़क पर हर दिन सेकड़ो गाड़िया निकलती हैं । प्लांट की उड़ती धूल से लोगों को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है साथ ही आस-पास की बस्तियों , जंगली जानवरों के साथ पर्यावरण को भी इससे नुकसान ऊठना पड़ रहा है। 10 साल बाद सतपुली उप जिलाधिकारी संदीप कुमार उचित कार्यवाही करने का भरोसा दे रहे है।
