अब महिलाएं बनेंगी ‘सौर सखी: मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना-महिलाओं को मिलेगा 50% तक अनुदान

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“सौर सखियां” बनेंगी आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नई पहचान – मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत महिलाओं को मिलेगा नया नाम और नया सम्मान – ‘सौर सखी’
हर जिले में होगा प्रशिक्षण, 250 मेगावाट का लक्ष्य पूर्ण, अब लक्ष्य 2500 मेगावाट तक का

देहरादून।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की महिलाओं को ऊर्जा के क्षेत्र में सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्य सेवक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने घोषणा की कि मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से जुड़ी महिलाओं को अब ‘सौर सखी’ के नाम से जाना जाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक नई सोच, एक नई पहचान और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नई दिशा है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत हर जिले में सोलर प्लांटों के रख-रखाव के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे युवा और महिलाएं तकनीकी रूप से दक्ष बन सकें।


📈 250 मेगावाट लक्ष्य हुआ पूर्ण – अब 2027 तक 2500 मेगावाट का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 250 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है। 2027 तक 2500 मेगावाट सोलर क्षमता विकसित करने का रोडमैप तैयार है। नई सौर ऊर्जा नीति के अंतर्गत रूफटॉप सोलर प्लांट्स, पीएम सूर्यघर योजना, और मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना को एकीकृत रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है।


💰 50% तक अनुदान, 4% ब्याज सब्सिडी, 25 वर्षों का बिजली क्रय अनुबंध

मुख्यमंत्री ने बताया कि 20 से 200 किलोवाट की परियोजनाओं पर 20% से 50% तक अनुदान दिया जा रहा है, जबकि महिलाओं, अनुसूचित जातियों, जनजातियों और दिव्यांगजनों को 5% अतिरिक्त सहायता मिलेगी।
यूपीसीएल द्वारा 25 वर्षों के पावर परचेज एग्रीमेंट से निवेशकों को स्थायी आय की गारंटी भी मिल रही है।


🌍 सौर ऊर्जा: पर्यावरण हितैषी और आत्मनिर्भर भारत की कुंजी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन और 2070 तक कार्बन न्यूट्रल राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय किया है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के गठन से भारत सौर ऊर्जा क्रांति का वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।


💬 स्थानीय आवाजें – पहाड़ की ज़मीन को मिल रही नई पहचान

उत्तरकाशी के शैलेन्द्र सिंह ने कहा, “बंजर ज़मीनों का सौर ऊर्जा में प्रयोग बहुत ही सराहनीय है।”
चमोली के विकास मोहन ने मांग की कि “योजना को विकासखंड स्तर तक पहुंचाना चाहिए।”
पौड़ी की रूपा रानी ने सुझाव दिया कि “महिलाओं के लिए अलग सोलर पॉलिसी बने।”
चंपावत के केतन भारद्वाज ने “ट्रेनिंग की ज़रूरत” को ज़ोर देकर उठाया।


🏔️ स्थानीय उत्पाद, स्थानीय रोजगार – आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय रोजगार, रिवर्स पलायन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।


👥 कार्यक्रम में ये रहे शामिल…

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, अपर सचिव एवं निदेशक उरेडा श्रीमती रंजना राजगुरू, प्रबंध निदेशक यूजेवीएनएल श्री संदीप सिंघल, तथा पिटकुल के प्रबंध निदेशक श्री पी.सी. ध्यानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


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