टिहरी–उत्तरकाशी सीमांत में पेट्रोल-डीजल संकट, 1 लाख लोग परेशान — 140 KM तक कोई विकल्प नहीं
टिहरी/उत्तरकाशी:
पहाड़ के एक बड़े हिस्से में इन दिनों सड़कें हैं, वाहन हैं… लेकिन पेट्रोल-डीजल नहीं।
टिहरी और उत्तरकाशी के सीमांत इलाकों में हालात ऐसे बन गए हैं कि एक लाख से ज्यादा लोग ईंधन संकट से जूझ रहे हैं।
टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र प्रतापनगर और उत्तरकाशी के डुंडा ब्लॉक में पिछले कई दिनों से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति ठप है। नतीजा—दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 140 किलोमीटर के दायरे में केवल दो पेट्रोल पंप हैं, और दोनों हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP) से जुड़े हुए हैं।
अब जब इन पंपों पर तेल ही नहीं है, तो पूरे इलाके की रफ्तार थम गई है।
“कंपनी-डीलर विवाद में फंसी जनता”
सामाजिक कार्यकर्ता और प्रधान ग्राम धनेटी चंद्र मोहन भट्ट ने बताया कि मामले में जब HP कंपनी के स्टेट सेल हेड दीपक कौशिक से बात की गई तो उन्होंने कहा:
“डीलर की ओर कंपनी का कुछ बकाया है। भुगतान होने के बाद ही आपूर्ति बहाल की जाएगी।”
यानी साफ है — कंपनी और डीलर के बीच का आर्थिक विवाद अब जनता की परेशानी बन गया है।
पंप संचालक का दावा — 43 लाख चुका चुके, 27 लाख बाकी
दूसरी तरफ शांति फीलिंग स्टेशन के संचालक का कहना है कि स्थिति इतनी सीधी नहीं है।
उनके मुताबिक:
- कंपनी डीलर को लगभग 1 करोड़ रुपये की सेल-बेस सीमा देती है
- इस पर लगभग 18% ब्याज लिया जाता है
- पिछले 10 दिनों में 43 लाख रुपये जमा किए जा चुके हैं
- अब करीब 27 लाख रुपये का बकाया रह गया है
संचालक का कहना है कि इसमें अधिकांश भुगतान सरकारी विभागों का है, जो आमतौर पर 2–3 महीने के भुगतान चक्र में आता है।
140 KM तक नहीं कोई दूसरा पंप
यह समस्या इसलिए और गंभीर है क्योंकि इस दुर्गम इलाके में 140 किलोमीटर तक पेट्रोल-डीजल का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
इसका असर सीधे पड़ रहा है:
- मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली गाड़ियों पर
- किसानों के काम पर
- स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों पर
- और आपातकालीन सेवाओं पर
एक स्थानीय निवासी ने गुस्से में कहा:
“पहाड़ में पहले ही सुविधाएं कम हैं… अब अगर पेट्रोल भी नहीं मिलेगा तो जीना कैसे होगा?”
प्रशासन भी चिंतित
इस पूरे मामले की जानकारी तीनों तेल कंपनियों के समन्वय कार्य से जुड़े के. के. गुप्ता को भी दी गई है।
उन्होंने सलाह दी कि जिला पूर्ति अधिकारी से संपर्क किया जाए और अपने स्तर से भी प्रयास करने की बात कही।
वहीं जिला पूर्ति अधिकारी टिहरी मनोज डोभाल का साफ कहना है:
“पेट्रोल-डीजल अत्यावश्यक सेवा है। किसी भी परिस्थिति में इसकी आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। जरूरत पड़े तो कंपनी खुद पंप चलाकर भी सेवा जारी रखे।”
तनावपूर्ण समय में नई चिंता
जब देश-दुनिया का माहौल पहले ही तनावपूर्ण है और सरकारें आपदा प्रबंधन और आवश्यक सेवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगी हैं, तब सीमांत और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में ईंधन संकट गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जनता की सीधी मांग
क्षेत्र की जनता ने शासन-प्रशासन और तेल कंपनियों से मांग की है कि:
➡ पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए
➡ सीमांत क्षेत्रों में वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था बनाई जाए
➡ ताकि आम लोगों को राहत मिल सके
🔥 पहाड़ पूछ रहा है एक सवाल:
क्या कंपनी और डीलर की लड़ाई में सीमांत के लोगों की जिंदगी यूँ ही ठप होती रहेगी… या कोई तुरंत समाधान निकलेगा?
