हथौड़े की एक चोट… और दोस्त ने ही दोस्त की ले ली जान!

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स्कूटी पर ले जा रहा था इलाज के लिए, रास्ते में ही उतार दी दोस्ती की आखिरी सांस


देहरादून की सड़कों पर खून से सना एक दोस्ती का काला सच सामने आया है। मामूली विवाद… और हथौड़े की एक वार ने हमेशा-हमेशा के लिए दो दोस्तों को जुदा कर दिया।

आज परेड ग्राउंड के पास जो हुआ, उसने हर किसी को हिलाकर रख दिया।


झगड़ा, हाथापाई… फिर दोस्ती का कत्ल!

परेड ग्राउंड के पास चीख-पुकार मची। राहगीर भी समझ नहीं पाए कि स्कूटी पर बैठे दो दोस्तों में अचानक क्या हो गया।

डालनवाला पुलिस के मुताबिक, संतोष साहु और शिबरन साहनी बचपन के दोस्त थे। संतोष रेहड़ी लगाता था, शिबरन मिस्त्री का काम करता था।

दोनों में दून क्लब के पास किसी बात पर झगड़ा हो गया। बात इतनी बढ़ी कि हाथापाई शुरू हो गई। बीच-बचाव मृतक के भाई ने किया, लेकिन किसे पता था कि मामला यहां खत्म नहीं होगा…


इलाज के लिए स्कूटी पर निकला… पर दोस्त ही बन गया कातिल!

झगड़े में शिबरन के चेहरे पर हल्की चोट आई। संतोष दोस्ती निभाने को उसे अपनी स्कूटी पर बैठाकर अस्पताल ले जा रहा था।

लेकिन कुछ ही मीटर दूर, शिबरन ने पीछे से हथौड़े का वार संतोष के सिर पर कर दिया।

लोगों ने जब तक शोर मचाया, संतोष खून में लथपथ गिर चुका था। हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


“वो मेरा दोस्त था… पर गुस्सा संभला ही नहीं!”

पूछताछ में शिबरन ने पुलिस को बताया:

“संतोष मेरा दोस्त था। पर उस दिन उसने मुझे गाली दी, मारा भी। गुस्सा इतना बढ़ गया कि मैंने सोच लिया, इसे खत्म कर दूं। जब वो स्कूटी चला रहा था, मैंने हथौड़ा निकालकर मार दिया।”

ये बयान सुनकर पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए।


सन्न कर देने वाली वारदात

घटना के बाद डालनवाला पुलिस ने शिबरन को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

मृतक संतोष साहु मूल रूप से झारखंड का रहने वाला था, पर पिछले कुछ वर्षों से देहरादून में रहकर काम कर रहा था।

इलाके में इस खौफनाक वारदात के बाद सनसनी फैली हुई है। हर कोई यही कह रहा है —

“ऐसी भी क्या दुश्मनी… जो दोस्ती की डोर ही तोड़ दे?”


सोचने पर मजबूर कर देने वाला सवाल

एक छोटी-सी कहासुनी… और हथौड़े की एक वार ने खत्म कर दी एक जान, और शायद दो परिवारों की जिंदगी भी।

कहीं हमारी गुस्से की आग इतनी तेज तो नहीं हो रही कि इंसानियत ही राख हो जाए?

क्या वाकई किसी विवाद की कीमत इतनी बड़ी हो सकती है?


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