🔥 बड़ा खुलासा: एक शिकायत… और हिल गया पूरा स्वास्थ्य तंत्र!
पूर्व कृषि अधिकारी चंद्रशेखर जोशी की पहल पर स्वास्थ्य विभाग सख्त, राज्यभर के डॉक्टरों को चेतावनी
देहरादून | विशेष रिपोर्ट

उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक आम नागरिक की आवाज़ ने वो कर दिखाया, जो बड़े-बड़े निरीक्षण भी नहीं कर पाए।
भीमताल निवासी, पूर्व कृषि अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर जोशी की एक शिकायत ने पूरे राज्य के चिकित्सकों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
👉 अब डॉक्टरों को नियम मानने ही होंगे… वरना होगी कड़ी कार्रवाई!
⚡ शिकायत जिसने मचाया हड़कंप
सीएमएचएल पोर्टल पर दर्ज शिकायत संख्या CMHL-112025-11-891129 (14 नवंबर 2025) के निस्तारण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सामने चौंकाने वाली सच्चाई आई।
शिकायत में आरोप था कि—
- कई डॉक्टर अपनी मान्यता प्राप्त डिग्रियाँ प्रदर्शित नहीं कर रहे
- क्लीनिक और पर्चियों पर राज्य मेडिकल काउंसिल पंजीकरण संख्या गायब
- आम मरीज झूठी या अधूरी जानकारी के कारण भ्रमित
👉 सवाल साफ था — जब पहचान ही संदिग्ध हो, तो इलाज पर भरोसा कैसे किया जाए?
🩺 विभागीय जांच में खुली पोल
स्वास्थ्य महानिदेशालय, देहरादून की जांच में पुष्टि हुई कि—
INDIAN MEDICAL COUNCIL (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations-2002
के पैरा 1.4.1 और 1.4.2 का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
📌 नियम साफ कहते हैं—
✔ डॉक्टर को अपनी पंजीकरण संख्या क्लीनिक, पर्ची, प्रमाण पत्र और रसीद पर दिखानी होगी
✔ केवल मान्यता प्राप्त डिग्रियाँ ही नाम के साथ लिखी जा सकती हैं
लेकिन हकीकत इससे उलट निकली।
🚨 स्वास्थ्य विभाग का सख्त अल्टीमेटम
स्वास्थ्य विभाग ने पत्र संख्या 24/राजयो/13/2025 जारी कर सभी जिलों को चेतावनी दे दी है—
➡ सभी चिकित्सकों को तुरंत नियम पालन के निर्देश
➡ उल्लंघन पर कठोर विभागीय कार्रवाई
➡ स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जन-विश्वास अनिवार्य
👉 अब “लापरवाही” नहीं चलेगी!
🧑🌾 एक नागरिक की लड़ाई बनी राज्य की मिसाल
शिकायतकर्ता चंद्रशेखर जोशी कहते हैं—
“जब डॉक्टर अपनी सही डिग्री और पंजीकरण संख्या नहीं दिखाते,
तो मरीज धोखे में रहता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा तभी बचेगा, जब नियमों का पालन होगा।”
उनकी यह पहल अब पूरे उत्तराखंड के लिए दिशा-निर्देश बन चुकी है।
🌐 जन शिकायत… और सिस्टम में सुधार
स्वास्थ्य विभाग का भी मानना है—
✔ ऑनलाइन शिकायत प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी
✔ आमजन की शिकायतों से तुरंत कार्रवाई संभव
✔ यह मामला साबित करता है कि जन सहभागिता से सिस्टम सुधरता है
✨ आख़िरी बात
यह खबर सिर्फ नियमों की नहीं, भरोसे की है।
जब एक नागरिक सवाल उठाता है और सरकार जवाब देती है—
तो समझिए, लोकतंत्र जिंदा है।
👉 अब देखना यह है—
क्या हर क्लीनिक में सच दिखाई देगा?
या फिर अगली शिकायत का इंतज़ार?
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