भूमि प्रबंधन को कृषि वानिकी प्रजातियों की खेती पर प्रशिक्षण का आयोजन  

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देहरादून। विस्तार प्रभाग, आईसीएफआरई वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून द्वारा “भूमि प्रबंधन हेतु कृषि वानिकी प्रजातियों की खेती” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण 23 से 25 सितम्बर को एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर विस्तार वन विज्ञान केंद्र परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। उक्त प्रशिक्षण का उद्घाटन प्रोफेसर प्रकाश सिंह, कुलपति, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में प्रोफेसर सिंह ने भूमि के बेहतर उपयोग, सतत आय सृजन एवं पारिस्थितिक संतुलन के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री की महत्ता के बारे में बताया। तकनीकी सत्र में वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून एवं एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के विषय विशेषज्ञों द्वारा एग्रोफॉरेस्ट्री के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए गए, जो मृदा संरक्षण में सहायक हैं तथा ईंधन, चारा, लकड़ी, खाद्य एवं अन्य दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में मददगार हैं, जिनकी व्यावसायिक संभावनाएं भी हैं। एफआरआई, देहरादून के विषय विशेषज्ञों द्वारा कीट एवं फफूंद संक्रमण से वृक्षों एवं फसलों की सुरक्षा पर भी व्याख्यान दिए गए। यह व्याख्यान अनुसंधान निष्कर्षों पर आधारित थे तथा उत्तराखंड एवं आस-पास के पहाड़ी राज्यों के कई महत्वपूर्ण केस स्टडी से समर्थित थे।
प्रतिभागियों ने एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय की नर्सरी का भ्रमण भी किया और वहां ईंधन, चारा, खाद्य, लकड़ी तथा कई उपयोगी गैर-काष्ठ वनोपजों की दृष्टि से महत्वपूर्ण एग्रोफॉरेस्ट्री प्रजातियों के पौधों के बारे में जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण में 60 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें महिला कृषक, स्वयं सहायता समूह तथा छात्र शामिल थे, ने भाग लिया। विस्तार प्रभाग की टीम जिसमें डॉ. चरण सिंह, लोकिंदर शर्मा, पवन देवशाली, नवीन, अमित सिंह तथा वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून के विषय विशेषज्ञों ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर की विशेषज्ञ टीम कृ प्रो. ए. के. नेगी, डॉ. डी. एस. चौहान, डॉ. आर. एस. नेगी, डॉ. एल. एस. कंडारी एवं डॉ. हिमशिखा गोसाईं के सक्रिय समन्वय में प्रशिक्षण को सफल बनाने में सराहनीय कार्य किया।

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