“लकवा पीड़िता को मिली नई सांस, डीएम के रायफल फंड से 1.50 लाख की राहत — मुख्यमंत्री की प्रेरणा से असहायों की जिंदगी में उम्मीद की किरण!”

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रायफल क्लब फंड बना गरीबों का मसीहा, 20 साल बाद असहायों की मदद में लगी गोलियों की फीस!


देहरादून, 07 जुलाई 2025।
गोली चलाने का शौक… और गरीब की जिंदगी बचाने का सपना — कौन सोच सकता था कि इन दोनों का कोई रिश्ता हो सकता है! मगर देहरादून के डीएम सविन बंसल ने कर दिखाया कुछ ऐसा ही कमाल, जिसने 20 साल बाद रायफल क्लब फंड को नई पहचान दी।

आज कलेक्ट्रेट में एक-एक चेहरा उम्मीद से भरा था। किसी की आंखों में आंसू थे, तो किसी के होठों पर मुस्कान। वजह थी रायफल क्लब फंड से 1.50 लाख रुपये की मदद, जो 6 असहाय, विधवा और जरूरतमंदों को दी गई।

“हम गरीबी पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते, लेकिन मदद करके किसी की तकलीफ जरूर कम कर सकते हैं।”सविन बंसल, जिलाधिकारी देहरादून


लकवा पीड़िता आशा देवी — “अब घर की दहलीज़ पार कर पाऊंगी!”

सबसे दिल छू लेने वाला नज़ारा था डालनवाला की आशा देवी का। 12 साल से लकवा पीड़ित आशा देवी किराए के मकान में किसी तरह जिंदगी काट रही थीं। आज डीएम ने न सिर्फ 25 हजार का चेक थमाया, बल्कि सारथी वाहन से उन्हें सुरक्षित घर तक भी पहुँचवाया।

“अब अस्पताल जाने का किराया कैसे दूं, यही सोचती थी। आज लगा, भगवान ने डीएम साहब को भेजा है।”आशा देवी


गोलियों के लाइसेंस से गरीबों की जिंदगी बदलेगी!

क्या आप जानते हैं? रायफल क्लब फंड दरअसल शस्त्र लाइसेंस फीस से आता है। डीएम ने इसे एक “लक्ज़री ट्रांजेक्शन” कहा — यानी बंदूक रखना शौक, लेकिन उसकी फीस अब असहायों की मदद में काम आ रही है।

देहरादून पूरे उत्तराखंड का पहला जिला बन गया है जिसने इस फंड का उपयोग गरीबों, विधवाओं और लाचारों के जीवन उत्थान में किया। 20 साल बाद इस फंड का दरवाज़ा आम जनता के लिए खोला गया है।


इनकी ज़िन्दगी बदली…

  • पूनम ठाकुर (गुलरघाटी): बच्चों की स्कूल फीस के लिए 25 हजार
  • बिरोजनी उनियाल (डालवाला): बच्चों की पढ़ाई के लिए मदद
  • खष्टी बिष्ट (नेहरू कॉलोनी): दूसरों के घरों में काम कर पेट पालने वाली असहाय महिला
  • रेशमी (विकासनगर): हादसे में घायल पति के इलाज के लिए मदद
  • बबीता (गांधीग्राम): अचार बनाने के कारोबार का सपना, मिला 25 हजार का सहारा
  • आशा देवी (डालनवाला): लकवा पीड़िता, मिली राहत की सांस

अब तक 9.70 लाख की मदद

रायफल क्लब फंड से अब तक ₹9.70 लाख की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। किसी को बच्चों के स्कूल के लिए वाहन, किसी को अस्पताल का बिल भरने में मदद। डीएम कहते हैं कि लाइसेंस से जमा ये पैसा असल में समाज की ताकत है।

“रायफल क्लब फंड सिर्फ बंदूक रखने वालों का पैसा नहीं, ये उस गरीब की आस है जिसे सरकार की नजर की सबसे ज्यादा जरूरत है।”सविन बंसल, डीएम देहरादून


सोचिए… गोलियां नहीं, जिंदगी बचाने की आवाज़!

देहरादून में रायफल क्लब फंड की ये नई कहानी बताती है — गोलियों के लाइसेंस से सिर्फ बंदूकें नहीं, किसी गरीब की मुस्कान भी खरीदी जा सकती है।

क्या आपके जिले में भी कोई ऐसा फंड किसी की जिंदगी बदल सकता है? सोचिए… क्योंकि असली ‘लाइसेंस’ तो इंसानियत का है!


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