पार्थ परमार का अंडर-14 टीम में चयन, 7 साल की मेहनत ने रचा इतिहास

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🏏 देहरादून का लाल बना उत्तराखंड की शान!
350+ मैच, 24 शतक और विराट कोहली जैसा जुनून — मियाँवाला के बेटे ने दिखा दिया बड़ा सपना


देहरादून।
कभी गली में बल्ला घुमाने वाला बच्चा…
आज उत्तराखंड की जर्सी पहनने जा रहा है।
देहरादून के मियाँवाला क्षेत्र से निकलकर पार्थ परमार ने वो कर दिखाया है, जिसका सपना हर क्रिकेट खेलने वाला बच्चा देखता है।
उत्तराखंड अंडर-14 क्रिकेट टीम में चयन होते ही घर-परिवार ही नहीं, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।


⭐ 7 साल का संघर्ष, अब मिली पहचान

साल 2018 से क्रिकेट की पिच पर पसीना बहाने वाले पार्थ की मेहनत आखिरकार रंग लाई।
7 साल, 350 से ज़्यादा मैच, 24 शतक और 13,000 से अधिक रन — ये आंकड़े नहीं, एक बच्चे के सपनों की कहानी हैं।

पार्थ का चयन दिसंबर में छिद्दरवाला स्थित आयुष क्रिकेट अकादमी में हुए ट्रायल्स के बाद हुआ, जहाँ पूरे प्रदेश से चुने गए सिर्फ 20 खिलाड़ियों में पार्थ भी शामिल हैं।


🧤 बैट भी, विकेट भी — ऑलराउंड टैलेंट

पार्थ सिर्फ एक बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि विकेटकीपर-बैटर हैं।
उनके खेल में आक्रामकता है, फोकस है…
और रोल मॉडल हैं — विराट कोहली

“मैं विराट कोहली जैसा बनना चाहता हूँ — टीम के लिए खेलना और जीत दिलाना चाहता हूँ,”
— पार्थ परमार


👨‍👩‍👦 पिता की दुकान, बेटे का सपना

पार्थ के पिता चंद्रपाल सिंह परमार, मियाँवाला में एक छोटी कन्फेक्शनरी की दुकान चलाते हैं।
मध्यमवर्गीय परिवार, सीमित संसाधन — लेकिन सपनों पर कोई सीमा नहीं।

“हमने सिर्फ भरोसा किया… आज बेटे ने हमें गर्व करने का मौका दिया,”
— पिता, चंद्रपाल परमार


👩‍🏫 पढ़ाई में भी अव्वल, मैदान में भी

पार्थ की मां पुष्पा परमार की आंखों में खुशी और गर्व साफ झलकता है।

“पार्थ खेल के साथ पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देता है। आज उसका चयन सिर्फ उसकी मेहनत नहीं, उसके संस्कारों की जीत है,”
— पुष्पा परमार

पार्थ राजहंस स्कूल में कक्षा 9 का छात्र है।


🏟️ कोच बोले: शुरू से ही अलग था पार्थ

हिमालय क्रिकेट अकादमी के कोच विजय सिंह ‘बंटू’ कहते हैं—

“पार्थ बचपन से ही अलग था। उसकी मेहनत, अनुशासन और जुनून ही उसे दूसरों से आगे ले गया।”


✈️ अब इंदौर की उड़ान

13 जनवरी को पार्थ उत्तराखंड अंडर-14 टीम के साथ इंदौर रवाना होगा।
15 दिन का कैंप, राज सिंह डूंगरपुर ट्रॉफी — और खुद को साबित करने का बड़ा मंच।


मियाँवाला की गलियों से लेकर इंदौर के मैदान तक…
पार्थ परमार की कहानी हर उस बच्चे के लिए उम्मीद है,
जो सपने देखता है और उन्हें सच करने की हिम्मत रखता है।

ये सिर्फ चयन नहीं…
ये भविष्य के सितारे की पहली रोशनी है।
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