एसएसपी के निर्देश पर प्रेमनगर पुलिस ने बुजुर्गों के दरवाज़े पर जाकर पूछा हाल, बांटे फल, दवाइयां और जीता दिल
ओपनिंग
देहरादून की गलियों में आज पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली नहीं कर रही, बल्कि उन दिलों की भी पहरेदार बन गई है, जो उम्र के इस मोड़ पर अकेले पड़ गए हैं। प्रेमनगर इलाके में बुजुर्गों के दरवाजे खटखटाती दून पुलिस ने आज मानो सर्द दीवारों में फिर से रिश्तों की गर्माहट भर दी।

मुख्य कंटेंट
देहरादून एसएसपी के आदेश पर प्रेमनगर पुलिस की चार टीमें उन बुजुर्गों तक पहुंचीं, जिनके बच्चे या परिवारजन उनके साथ नहीं रहते। पुलिस ने इलाके के 32 ऐसे सीनियर सिटीजन को चिन्हित किया, जिनकी जिंदगी अक्सर तन्हाई में डूबी रहती है।
पुलिसवालों ने हर बुजुर्ग के घर जाकर उनका हालचाल पूछा, उनकी जरूरतें जानी और उन्हें फल बांटे। एक बुजुर्ग ने बताया कि उनकी दवाइयां खत्म हो गई हैं। यह सुनते ही पुलिस ने बिना वक्त गंवाए मेडिकल स्टोर से दवाइयां मंगाकर उन्हें सौंप दीं।
“पुलिस आज हमारे लिए बच्चों जैसी बन गई है। जैसे बेटा-बेटी हाल पूछने आए हों,” कांपती आवाज़ में बोले प्रेमनगर के बुजुर्ग गोविंद सिंह। उनकी आंखों में नमी थी, पर चेहरे पर सुकून की झलक भी।
कुछ बुजुर्गों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी मुहैया कराया गया। पुलिसवालों के सिर पर हाथ रखते हुए बुजुर्गों ने उन्हें जुग जुग जीने का आशीर्वाद दिया।
बुजुर्गों को पुलिस हेल्पलाइन 112, थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी और बीट कांस्टेबल के मोबाइल नंबर भी दिए गए, ताकि वे कभी अकेलापन महसूस न करें।
दून पुलिस के इस मानवीय कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है। इलाके में लोग कह रहे हैं – “अगर पुलिस ऐसे ही दिल से काम करे, तो कोई भी बुजुर्ग अकेला नहीं रहेगा।”
क्लोजिंग लाइन (पॉवरफुल एंडिंग)
कानून की वर्दी में जब ममता उतर आए… तब वाकई पुलिस, “जनसेवक” कहलाने की हकदार बन जाती है।
