**कारगी में तबाही के मलबे पर सियासी गुस्सा!

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धस्माना का वार – “मलबा हटाना राहत नहीं… इंसान बचाओ!”**

नगर निगम पर लापरवाही के गंभीर आरोप, ध्वस्त हुए आशियाने, बर्बादी में डूबे परिवार

देहरादून।
तेज बारिश ने कारगी के बंजारावाला नाले को कहर में बदल डाला। रात के सन्नाटे में अचानक ढही नाले की पुश्ता… और सुबह उजाला होते ही सामने आई इंसानी बर्बादी की तस्वीरें। दो मकान जमींदोज़, दर्जनों घरों में दरारें, और सैकड़ों सपने मलबे के नीचे दबे पड़े हैं। इसी तबाही के बीच पहुंचे प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना, और प्रशासन को सीधे लहजे में घेरा –

“सिर्फ बुलडोजर भेज कर मलबा हटाना आपदा राहत नहीं होती… जिन्होंने सबकुछ खो दिया, उनके खाने-पीने, रहने की जिम्मेदारी प्रशासन की है!” – सूर्यकांत धस्माना

लोगों का सबकुछ लुटा – घर, राशन, कपड़े… सब मलबे में!

धस्माना ने घटनास्थल पर खड़े होकर ही मोबाइल से जिलाधिकारी सविन बंसल, एसडीएम हरि गिरी और नगर निगम मेयर सौरभ थपलियाल से बात की। उन्होंने बताया कि जिनके मकान गिरे, वो कानूनी रूप से अपनी ज़मीन पर बसे थे।

“शाहिद पुत्र असगर और शाहिद पुत्र रईस अहमद के मकान पूरी तरह खत्म हो गए हैं। घर का सामान, राशन, कपड़े, बिस्तर… कुछ नहीं बचा। इन परिवारों को तुरंत मदद चाहिए।” – सूर्यकांत धस्माना

नगर निगम पर आरोप – “लापरवाही ने ली लोगों की छत”

धस्माना ने नगर निगम पर सीधा हमला बोला। उनका आरोप है कि बंजारावाला नाले पर पुश्ता गिरने की असली वजह नगर निगम की लापरवाही है।

“नगर निगम ने समय रहते पुश्ता और जाल नहीं डाला, इसी वजह से हादसा हुआ। अगर प्रशासन ने मदद नहीं की, तो मैं फिर लौटूंगा और इन परिवारों को राहत दिलाकर ही रहूंगा।” – सूर्यकांत धस्माना

मेयर बोले – शहर से लौटते ही पहुंचूंगा मौके पर

मेयर सौरभ थपलियाल से भी धस्माना ने मोबाइल पर बात की। मेयर ने भरोसा दिलाया कि वे जैसे ही शहर लौटेंगे, प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और निगम की टीम भेजकर पुश्ता दुरुस्त करवाएंगे।

लोगों में खौफ, आंखों में आंसू

घटना के चश्मदीद लोग कह रहे हैं कि रात के वक्त तेज आवाज़ के साथ पुश्ता ढह गया। अब हर तरफ सिर्फ दरारें, गिरे हुए मकान, और मलबे में दबा जीवन नजर आ रहा है। मोहम्मद इस्लाम, मेहताब, दिनेश नौटियाल और शहीद समेत कई स्थानीय लोग मौके पर मौजूद रहे, जो डरे हुए और गुस्से में हैं।

“अब हमारा जीना कैसे होगा? बच्चों का स्कूल, घर, सामान… कुछ भी नहीं बचा।” – शाहिद, पीड़ित

मलबा सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं… सपनों की कब्रगाह है!

कारगी की इस आपदा ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या आपदा प्रबंधन सिर्फ बुलडोज़र और जेसीबी तक सीमित रहेगा? या कोई इंसानी पहलू भी बचेगा?

कारगी के मलबे के नीचे सिर्फ दीवारें नहीं दबीं… वहां कई सपने, उम्मीदें और जिंदगियां दफन हैं।


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