एक फौजी का जुनून – भारतीय सेना से सेवा निवृत्ति के बाद अपने घर को ही आर्मी का ट्रेनिंग कैंप बना डाला | 35 साल की उम्र मे फौज से रिटायर होने के बाद भी ये फौजी चुप नहीं बैठा, बल्कि अपने जैसे कमांडो तैयार करने के काम मे जुट गया |
उत्तराखंड के पहाड़ो मे जहा युवाओ मे जोश है उमंग है पर तकनीकी दिशा निर्देशन के अभाव मे युवा दिशा भ्रमित हो रहे है, और युवाओ का एक बड़ा वर्ग नशे के अंधेरे कुंवे मे घुसता चला जा रहा है | ऐसे मे इस पूर्व फौजी ने न सिर्फ इन्हे नशे ने मार्ग मे जाने से रोका बल्कि सैनिक को रोल मोडल बनाते हुए इसकी दिनचर्या को आम लोगो के लिए प्रेरणा श्रोत बना डाला | फौजी राजेश सेमवाल इन दिनो उत्तरकाशी जिले के सुदूर पुरोला मे युवाओ को सेना मे जाने के लिए प्रेरित करने का काम कर रहे है | इतना ही नहीं ,सेवा निवृत्ति के समय मिले जमा पूंजी को भी ट्रेनिंग कैंप तैयार करने मे खर्च कर डाला | आज इस कैंप मे न सिर्फ युवा बच्चे देश की सरहदों के लिए तैयार हो रहे है बल्कि महिला शासक्तिकरण की दिशा मे आगे बढ़ते हुए पहाड़ी की युवतियो के मन मे भी कुछ कर गुजरने का जोश भर दिया है, अब वे भी लड़को के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए देश के लिए कुछ करने की भावना से ओत प्रोत है |
पूर्व फौजी राजेश सेमवाल ने प्रयासो के सार्थक परिणाम भी अब सामने आने लगे है | बड़ी तादाद मे इस कैंप से युवा सेना मे भर्ती के के लिए चयनित हुए है , जिसके बाद कैंप का दायरा भी बढ़ने लगा है , प्रशिक्षण के लिए युवाओ की तादाद बढ्ने लगी है, संसाधन कम पड़ने लगे है, पर फौजी का भरोषा है कि इंतजाम हो ही जाएंगे कैसे ये उन्हे भी नहीं मालूम |
चलिये आज आपको मिलाते है, फौजी राजेश सेमवाल से जो सरकारी सेवा से भले ही रिटायर हो गए हो पर असल ज़िंदगी मे अभी भी सेवा का अभियान जारी है-
