चीन और नेपाल के विरोध के बाद लिपूलेख बोर्डर तक सड़क तैयार – कैलाश यात्रा और सेना को रसद आपूर्ति हुई आसान

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बीआरओ ने भारत चीन सीमा पर पडोसी देशो द्वारा विवाद के बाद भी तय समय पर सडक मार्ग खोलकर दिखा दिया है कि भारत अपनी सीमा की हिफाजत करना जानता है | इस अड़क निर्माण के बाद न सिर्फ कैलास यात्रा में सहूलियत होगी बल्कि लेपुलेख बॉर्डर पर भारतीय फ़ौज को समय पर रसद आपूर्ति भी हो सकेगी

नदीम परवेज़। धारचूला

बीआरओ ने 14 हजार की ऊँचाई वाली गुंजी कुटी ज्योलीकांग आदि कैलाश यात्रा वाली सड़क यातायात के  खोल दी है । इस सडक पर लगातार काम चल रहा था अब हम पिथोरागढ़ जिले कि धारचूला तहसील की लिपूलेख सडक में दोनों क्षेत्रों में आसानी से फौज को रसद व स्थानीय नागरिकों को सभी आवश्यक सुविधाएं दे सकेंगे । बता दें कि बीआरओ ने लिपूलेख सडक भी हाल में ही पूरी की है।  जिसमें चायना ओर नेपाल ने आपत्ति भी दर्ज की  थी अब एक ओर सडक लिपूलेख बोर्डर के समीप दूसरी सीमा में भी हमारी पहूंच गयी है । अब हम चायना का सीधा सामना  कर सकेंगे ।

धारचूला(पिथौरागढ़) बीआरओ के 65 आरसीसी कम्पनी  ने गुंजी,, कुटी ज्योलीकांग आदि कैलाश 35 किलोमीटर की सड़क एईई अमन और जेई दीपक के नेतृत्व में  दिनरात कार्य करके शनिवार शाम तक पूरी तरह यातायात के लिए खोल दी है। बीआरओ के कमांडर कर्नल एन के शर्मा ने बताया कि सीमा के अंतिम गांव कुटी के लोग माइग्रेशन पहुँच जाने के बाद और सीमा में तैनात सुरक्षा कर्मियों , सेना आईटीबीपी ,की आवागमन में सुविधा हो इसे देखते हुए सड़क का कार्य जल्द पूरा कर यातायात के लिए खोलना आवश्यक था  2021 में काम में  तेजी आई । अब  सड़क बन जाने पर  सड़क निर्माण के अन्य कार्य मे तेजी आएगी।

बता दे बीआरओ ने पिछले साल गुंजी कुटी ज्योलीकांग तक कि सड़क का निर्माण कर दिया था।

शीतकाल में सुरक्षाकर्मी और गांव के लोग नीचे की घाटियों में आ जाते है।

सड़क खुल जाने से आदि कैलाशपर्वत* को दर्शन को जाने वालें  स्थानीय लोगो के साथ सुरक्षा कर्मियों और आईटीबीपी को भी राहत मिलेगी। और व्यास घाटी के 7 गांव के लोग पूजा पाठ और अपने मृत व्यक्तियों के अस्थियां ज्योलीकांग तीर्थ स्थल में पहुँचा सकेंगें उनको   राहत मिलेगी।

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