सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही गलत खबरें, उम्मीदवारों में बढ़ी बेचैनी, आयोग ने जारी किया सख्त खंडन
🔴 ओपनिंग
सोचिए… कोई चुनाव लड़ना चाहता है, टिकट की दौड़ में है और अचानक अफवाह उड़ती है कि अगर उसका नाम शहर और गांव दोनों की वोटर लिस्ट में है, तो उसकी उम्मीदवारी खत्म! यही डर और बेचैनी आज उत्तराखंड के पंचायत चुनावों पर मंडरा रही थी… लेकिन अब राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा ऐलान कर इन अफवाहों पर ताला लगा दिया है।
🟠 कहानी विस्तार
पिछले कुछ दिनों से व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पोस्ट और यूट्यूब वीडियोज़ पर एक ही बात गूंज रही थी —
“डबल वोटर हो तो पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते!”
कई लोग ये भी दावा कर रहे थे कि आयोग ने कोई नया आदेश जारी किया है। लेकिन आयोग ने इस सबको सिरे से खारिज कर दिया है।
🟡 आयोग का बयान
राज्य निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता ने दो टूक कहा:
“कोई नई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। पंचायत चुनाव केवल उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 के नियमों के तहत ही होंगे। जो प्रावधान पहले थे, वही लागू हैं।”
🟢 क़ानून क्या कहता है?
उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा 9(13) बिल्कुल साफ कहती है कि —
“जिसका नाम ग्राम पंचायत की निर्वाचक नामावली में दर्ज है, वही व्यक्ति वहां वोट भी डाल सकता है और चुनाव भी लड़ सकता है।”
यही नियम क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत पर भी लागू होते हैं। यानी कोई नई पाबंदी या रोक नहीं है।
🔵 अफवाहों से हड़कंप
चुनाव की तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों के बीच इस अफवाह ने कोहराम मचा दिया था। चमोली के एक युवक ने बताया —
“दो दिन से नींद नहीं आ रही थी। सब कह रहे थे चुनाव लड़ ही नहीं पाओगे। अब जाकर चैन मिला है कि अफवाह थी।”
🟣 आयोग की अपील
आयोग ने जनता और मीडिया दोनों से अपील की है —
“कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें। सही जानकारी के लिए केवल अधिनियम या हमारे आधिकारिक पोर्टल पर भरोसा करें।”
⚫ समापन (पावरफुल लाइन)
चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है… उसे अफवाहों के जहर से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। याद रखिए — सही जानकारी ही असली ताकत है।
