🔥 शून्य से शिखर तक:
सीमित साधन, असीम हौसला — ग्रामीण महिला की उड़ान अब राष्ट्रीय मंच पर
देहरादून | 22 जनवरी 2026
जहाँ हालात राह रोकते हैं, वहीं हौसले रास्ता बना लेते हैं। देहरादून जनपद के सहसपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शंकरपुर की रहने वाली संतोषी सोलंकी ने यही कर दिखाया है। कभी सीमित संसाधनों में संघर्ष करने वाली यह ग्रामीण महिला आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं — और अब 26 जनवरी को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में देश के सामने उत्तराखंड की सफलता की कहानी रखेंगी।

✨ एनआरएलएम से आत्मनिर्भरता तक का सफर
साल 2018 में संतोषी सोलंकी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर प्रिंटिंग प्रेस व्यवसाय की शुरुआत की।
शुरुआत छोटी थी, लेकिन सोच बड़ी।
“अगर सही मार्गदर्शन और भरोसा मिल जाए, तो गांव की महिलाएं भी किसी से कम नहीं,” — संतोषी सोलंकी
💼 60 लाख से ज्यादा का टर्नओवर, 4 महिलाओं को रोजगार
आज सेलाकुई में स्थित सोलंकी प्रिंटिंग प्रेस
📌 बैनर
📌 पोस्टर
📌 विज़िटिंग कार्ड
📌 सरकारी प्रचार सामग्री
📌 पैकेजिंग प्रिंट
जैसे कामों के लिए जानी जाती है।
अब तक 60 लाख रुपये से अधिक का टर्नओवर, और 4 स्थानीय ग्रामीण महिलाओं को रोजगार — यही है असली आत्मनिर्भरता।
🏭 बड़ी कंपनियों तक पहुंच
फ्लेक्स मशीन शुरू होने के बाद संतोषी के काम को नया विस्तार मिला।
आज इंडिया ग्लाइकोल्स, हैब फार्मा, हिमालयन, टपरवेयर जैसी नामी कंपनियाँ उनके यहां से ऑर्डर दे रही हैं।
👩👩👧👧 250 से अधिक महिलाओं की प्रेरणा बनीं संतोषी
संतोषी सोलंकी सिर्फ खुद आगे नहीं बढ़ीं —
उन्होंने 250 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता की राह दिखाई।
जिला मिशन प्रबंधक सोनम गुप्ता:
“एनआरएलएम से जुड़कर महिलाएं लखपति दीदी बन रही हैं। संतोषी इसका जीवंत उदाहरण हैं।”
सीडीओ अभिनव शाह:
“पूरे प्रदेश से संतोषी सोलंकी का चयन होना देहरादून और उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण है।”
🇮🇳 कर्तव्य पथ पर उत्तराखंड की बेटी
26 जनवरी 2026 —
जब कर्तव्य पथ पर देश की झांकियाँ निकलेंगी,
तब वहां उत्तराखंड की एक ग्रामीण महिला भी खड़ी होगी —
अपने संघर्ष, आत्मनिर्भरता और सफलता की कहानी के साथ।
🌺 एक नाम, जो उम्मीद बन गया
संतोषी सोलंकी आज सिर्फ एक उद्यमी नहीं,
बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आवाज़ हैं।
**👉 यह कहानी सिर्फ संतोषी की नहीं —
यह हर उस महिला की है, जो सपने देखती है…
और उन्हें सच करने का साहस रखती है।
