ट्रेकिंग के दौरान लापता चार दोस्तों को एसडीआरएफ ने तीन दिन बाद जंगल से सुरक्षित निकाला

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देहरादून। केदारनाथ से वासुकीताल-त्रियुगीनारायण रूट पर ट्रेकिंग को निकले देहरादून और नैनीताल के चार दोस्तों को एसडीआरएफ ने तोषी के जंगल से सुरक्षित निकाल लिया। उनकी खोजबीन के लिए एसडीआरएफ की पांच टीमें लगाई गई थीं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उनके मिलने पर खुशी जताई है और खोजबीन में लगे एसडीआरएफ के जवानों को बधाई दी है।

इससे पूर्व रेस्क्यू दल का सुबह करीब सात बजे मोबाइल के जरिये इन दोस्तों से संपर्क हुआ, लेकिन उनकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी। स्मार्ट फोन पास न होने के चलते उनकी लोकेशन जानने में दिक्कत आ रही थी। इसके बाद पुलिस ने स्थानीय युवकों की एक और टीम रेस्क्यू के लिए भेजी।  सोनप्रयाग के थानाध्यक्ष होशियार सिंह पंखोली की अगुवाई में स्थानीय युवकों की टीम त्रियुगीनारायण से तोषी के जंगल होते हुए रेस्क्यू के लिए रवाना हुई। दोपहर के वक्त इनसे संपर्क हुआ। लोकेशन पता चलते ही तोषी के जंगल में इन्हें खोज लिया गया।
एसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह फोन से इन दोस्तों से संपर्क हुआ था। इस दौरान उनसे लोकेशन पूछी गई। लेकिन तब वे सही जानकारी नहीं दे पाए। बताया कि घना जंगल और स्मार्ट फोन न होने से लोकेशन जल्द पता नहीं चल सकी। बताया जा रहा है कि  ट्रेक पर गए इन चारों लोगों के पास भोजन भी नहीं था। ऐसे में इन्हें जल्द से जल्द खोज निकालना रेस्क्यू टीमों के लिए चुनौती था। मोबाइल पर टीम ने इन दोस्तों को आग जलाने को कहा गया, ताकि धुएं से उनकी लोकेशन पता की जा सके। लेकिन घने जंगल में धुएं से भी कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सका था। देहरादून निवासी हिमांशु और जितेंद्र भंडारी तथा नैनीताल निवासी मोहित भट्ट और जगदीश बिष्ट केदारनाथ पहुंचे थे। 13 जुलाई को मंदिर में दर्शन के बाद ये चारों दोस्त वासुकीताल के लिए रवाना हो गए थे। लेकिन उसी देर शाम तक त्रियुगीनारायण नहीं पहुंचने पर इनके अन्य साथी ने सोनप्रयाग पुलिस को मामले की जानकारी दी थी। जिसके बाद 14 जुलाई से इनकी खोजबीन शुरू की गई थी।

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