रानीखेत से उद्यान निदेशालय देहरादून शिफ्ट करना अनुचितः गरिमा दसौनी

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देहरादून। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्या गरिमा महरा दसौनी ने उद्यान निदेशालय चैबटिया रानीखेत को देहरादून शिफ्ट किया जाना रानीखेत की जनता के साथ धोखा बताया। उन्होंने कहा राज्य के लिए यह परंपरा ठीक नहीं है।
गरिमा दसौनी ने कृषि मंत्री सुबोध उनियाल एवं भाजपा पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा कि पर्वतीय अंचलों को सौगात देने के बजाय जब-जब भाजपा की सरकार आई तब-तब उन्होंने विकास के नाम पर मात्र पहाड़ के कार्यालयों को देहरादून शिफ्ट करने काम किया है। भाजपा ने अपने कार्यकाल में कई बडे कार्यालय पूर्व में भी पहाड़ों से शिफ्ट किये हैं।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मौसम विभाग, भेषज कार्यालय एवं खादी ग्रामोद्योग जैसे विभागों को भी शिफ्ट किया जा चुका है। कहा कि रानीखेत में जो ट्रेजरी थी उसे भी भाजपा के द्वारा ही सब ट्रेजरी में तब्दील कर दिया है। एक तरफ भाजपा के नेता पहाड़ से पलायन रोकने की बात करते हैं और दूसरी तरफ पहाड़ से महत्वपूर्ण विभागों को देहरादून शिफ्ट करने का काम कर रहे हंै। अविभाजित उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर रानीखेत के चैबटिया में उद्यान निदेशालय की स्थापना 1953 में की गई थी जिसका मकसद उसे रिसर्च एवं ट्रेनिंग सेन्टर के रूप में विकसित करने का और पहाड़ी क्षेत्र के कृषि और बागवानी पर शोध करने का था। ऐसे में इसे एक मैदानी जिले में शिफ्ट किये जाने का क्या औचित्य है यह समझ से परे है।
दसौनी ने कहा कि यह निर्णय रानीखेत की जनता के साथ कुठाताघात है और रानीखेत की जनता में इस निर्णय के खिलाफ भारी आक्रोश है। उन्होंने कृषि मंत्री ने निवेदन करते हुए कहा कि यह निर्णय रानीखेत की जनता के हित में नहीं है इसलिए इस पर पुनर्विचार किया जाये। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो भाजपा गैरसैंण को राजधानी बनाने की बात करती है वहीं दूसरी और पर्वतीय जनपदों के साथ छलावा कर रही है।
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