हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच झूल रही उत्तरकाशी जिला पंचायत का असर अब पौराणिक माघ मेले पर भी देखने को मिल रहा है, पिछले 2 वर्ष कोरोना काल की भेंट चढ़ने के बाद अब जब लोगों को एक बार पौराणिक माघ मेला में अपने देवी देवताओ के साथ बड़ा हाट थौलू की उम्मीद जगी तो एक बार फिर माघ मेला हाईकोर्ट में लटकता हुआ दिखाई दिया , हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट से मेला कराने की अनुमति लेकर आ गए और हाई कोर्ट का फैसला निरस्त हो गया , उसके बाद भी नगर में मेले को लेकर तमाम तरह की सुगबुगाहट का दौर अभी भी जारी है .
देर से हुए टेंडर के बाद अब कब पंडाल सजेगा कब दुकानें बनेंगे कब झूले और चरखिया लगेंगी इन पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं
जिला और पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के लिहाज से अपनी पूरी तैयारी कर ली है सीओ सिटी अनुज कुमार की माने मेला परिसर को 30 से अधिक सीसी कैमरे से सुरक्षा दी जाएगी,
वही नगर पालिका द्वारा रामलीला मैदान में चरखी और झुला लगने वाले स्थान पर कूड़ा डंप किए जाने से के बाद लोगों में अपनी सुरक्षा को लेकर कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं
मेला ठेकेदार संदीप चौहान ने बताया इस तरह की कोई खतरे वाली बात नहीं है क्योंकि नगरपालिका ने उन्हें मैदान पर रोलर चला कर दिया है और उनका झूला चर्खी का पूरा लोड पूरा लोड त्रस पर ट्रांसफर होता है ना कि फाउंडेशन पर
ऑनलाइन मार्केट के प्रचलन के बाद वैसे ही मंदी की मार झेल रहे उत्तरकाशी के व्यापारियों को बिना GST के सामान बेचने वालो से वैसे ही नाराजी तो रहती है उस पर इस बार मेले की अवधी एक सप्ताह से बढाकर ११ दिन करने से उनकी आर्थिकी पर क्या प्रभाव पड़ेगा ये आने वाला समय बताएगा .
अब देखना दिलचस्प होगा कि इया बार मेले के दौरान मैदान में उगी हुई घास क्या सलामत रह पाती है, क्या मैदान में कूड़े के ढेर मेले के बाद भी यूं ही बरकरार रहेंगे या इस बार मेला एक कहानी लिखकर जायेगा .
