स्वच्छता अभियान की पोल खोलता एक सच।

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सफाई अभियान का एक सच ये भी।

झंडा रोहण के दिन भी नही दिखा चिराग तले अंधेरा।

उत्ततारखण्ड के सबसे पहले बड़े आर्च ब्रिज में पसरी गंदगी।

गिरीश गैरोला 
चिराग तले अंधेरा इसलिए भी होता है कि उसके नीचे किसी का ध्यान ही नही जाता है और रोशनी से आंख मिलाकर देखने की हर आंख में क्षमता नहीं होती।
पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान को ठेकेदार कंपनियां किस कदर पलीता लगा रही है इसका एक नमूना उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ में देखने को मिला।
टिहरी झील के उत्तरकाशी जिले में पहुँचने के बाद देवीसौड़ में 52 करोड़ की लागत का पुल निर्मित किया गया। निर्माण के बाद ठेकेदारों ने मजदूरों के लिए बनाई गई झोपड़ीयो का मैटीरियल तो हटा लिया किन्तु कूड़ा वही बिखरा छोड़ दिया।
उत्ततारखण्ड का अभी तक का ये सबसे बड़ा आर्च ब्रिज चिन्यालीसौड़ में ही बनकर इसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहा है वही  इसकी तलहटी में मजदूरों की झोपड़ियो को हटाने के बाद यहाँ फैला ये  कूड़ा रेशम पर टाट का पैबंद सा नजर आ रहा है।
इससे पूर्व 15 अगस्त के मौके पर पुल के विधिवत उद्घाटन से पूर्व जिले के अधिकारी और विधायक  ने पूरे लाव लश्कर के साथ पुल पर झंडारोहण किया किन्तु सफाई अभियान में फ़ोटो और सेल्फी लेने वालों ने भी इस चिराग के तले अंधेरे पर गौर करना उचित नही समझा।
सफाई अभियान को ठेंगा दिखाने का ठेकेदार कंपनियों का यह पहला मामला नही है इससे पूर्व भी मजदूरों के लिए टॉयलेट्स निर्माण नही करने को लेकर भी कई बार एनजीटी इन्हें फटकार लगा चुकी है।
बताते चले कि सड़क और पुल निर्माण दाई संस्थाओं की लेबर,  सफाई अभियान को ठेंगा दिखाते हुए अक्सर नदी के किनारे ही शौच को जाते देखे गए है जिसकी पूर्व में कई ग्राम प्रधानों ने इस तरह की शिकायत भी की थी।
जिसकी चलती उसकी क्या गलती
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