-महिला उद्यमी ने स्वावलंबी उत्तराखंड की ओर बढ़ाया अपना कदम
–स्वदेशी तत्त्व ऑर्गेनिक्स उत्तराखंड के किसानों को रोजगार के नए अवसर देगा
देहरादून। स्वदेशी तत्व ऑर्गैनिक्स ने देहरादून में अपनी उत्पाद श्रृंखला शुरू की। स्वदेशी तत्व संगठन उत्तराखंड के किसानों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक नया अवसर लेकर आ रहा है। यह उत्तराखंड की भूमि से समृद्ध हिमालय का एक ब्रांड है, जो पूर्ण रूप से आयुर्वेदा, होम एसेंशियल, कास्मेटिकस, हेल्थ सप्लीमेंट्स और अन्य ऐसे दैनिक जरूरतों के लिए आवश्यक उत्पादों का निर्माण करता है। पद्म भूषण और पद्मश्री डॉ अनिल जोशी, संस्थापक हेस्को, इस कार्यक्रम के चीफ गेस्ट रहे। आर.के जैन, डायरेक्टर सी.एम.आई हॉस्पिटल, चेयरमैन उत्तराखंड माइनॉरिटी कमिशन, जोगिन्दर सिंह पुंडीर, स्टेट वाईस प्रेजिडेंट किसान मोर्चा, डॉ महेश कुड़ियाल, सह संस्थापक सी.एम.आई हॉस्पिटल और विनय भारती, मैनेजिंग डायरेक्टर स्टेट आर्गेनिक बोर्ड, गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित रहे।
अंजलि अंथवाल, फाउंडर और मेण्टर, स्वदेशी तत्व ऑर्गैनिक्स ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा “स्वदेशी तत्व ऑर्गैनिक्स के सभी उत्पाद बहुत ही उचित और किफायती हैं और स्वास्थ्य के लिए भी लाभ दायक हैं। यह एक हिमालय का ब्रांड है, जो उत्तराखंड की भूमि से फला-फूला है, जो आयुर्वेदा, होम एसेन्टियल, कॉस्मेटिक और हेल्थ सप्लीमेंट्स और एफएमसीजी उत्पादों पर काम करता है। शुरुवाती दिन से ही मानवता और हिमालय के लिए हमारा प्यार है प्रोत्साहित करता रहा है। हमारी टीम ने बहुत कम समय में देखभाल और जुनून के साथ आयुर्वेदा की प्रामाणिकता वाले उत्पादों की एक श्रृंखला विकसित की है। मिशन “स्वावलम्बी उत्तराखंड”, हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन (हेस्को) और स्वदेशी तत्त्व विज्ञान का एक संयुक्त सपना है। स्वदेशी तत्त्व ऑरगनिक्स, फील्ड टू फोर्क के कोलोबोरेटिवे इंडस्ट्रियल रेवोलुशन मोडल के साथ हिमालयी किसान को स्वयं के औद्योगिक सेट के साथ एक आत्म-निर्भर उद्यमी में परिवर्तित करता है। स्वदेशी तत्व ऑर्गॅनिक्स कृषि उत्पादों और हिमालयी क्षेत्र में उगाए उत्पादों को बाजार योग्य मंच उपलब्द करता है।‘
ृ पद्म भूषण और पद्माश्री, डॉ अनिल जोशी, संस्थापक हेस्को, ने कहा, “हिमालय और पहाड़ों के लोगों के बीच हमेशा यह पीड़ा रही है कि इसके संसाधनों का लाभ सही तरीके से उन तक नहीं पहुंच पाया है। इस संदर्भ में शायद अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हम आज तक ऐसे ब्रांड तक नहीं पहुंच पाए हैं, जिसे हम अपना बड़ा स्थानीय ब्रांड मानते हैं जिसमें सामूहिक भागीदारी है, जिसकी कोई चर्चा है। और जैसा कि मैंने हमेशा कई बार कहा है कि अब हिमालय और पहाड़ों में गांवों की भागीदारी के साथ उत्पाद बनाने का समय है। ऐसा ही एक सामूहिक प्रयास आज हमारे बीच में है, और इसका मूल उद्देश्य एक विकेन्द्रीकृत तरीके से दूर-दराज के घरेलू गाँवों को जोड़ने वाले सामूहिक उद्योग की कल्पना करना है। यह निश्चित रूप से एक प्रारंभिक पहल है और कुछ हद तक परिणाम भी बेहतर होने लगे हैं। हम इस उद्योग में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहते हैं। ग्रामीणों के लिए बेहतर आर्थिक के लिए सुदूर क्षेत्रों में काम करने वाले हमारे विभिन्न सामाजिक समूह, चाहे उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, देहरादून, चकराता या पहाड़ों में अन्य किसी स्थान में हैंय हम उनके संपर्क में हैं। इस तरह के उद्योगों से जुड़ने के लिए हमने शुरुआत में उनसे दो दौर की बातचीत की है। वे यह जानकर बहुत उत्साहित हैं कि वे ऐसे उद्योग का हिस्सा हो सकते हैं जहाँ वे संगठन के साथ समान रूप से भागीदार हैं।
