“फरियादी की चीख सुन गूंजा डीएम का डंडा! टिहरी बांध पुनर्वास घोटाले पर धुआंधार एक्शन, जब्त हुई अफसर की गाड़ी”

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जिला प्रशासन का रौद्र रूप — वर्षों से दबा फर्जीवाड़ा फाइलों से बाहर, पुलमा देवी को मिला इंसाफ

देहरादून, 8 जुलाई 2025

कागजों में खेल… पीड़ित की आहें… और फिर प्रशासन का रौद्र रूप!

टिहरी बांध पुनर्वास विभाग में छुपे बैठे फर्जीवाड़े के भूतों को आखिर जिलाधिकारी सविन बंसल ने बाहर खींच ही लिया। शास्त्रीनगर तपोवन निवासी पुलमा देवी, जो सालों से इंसाफ की चौखट पर ठोकरें खा रही थीं, आखिरकार मुस्कुरा पाईं।

कहानी फिल्मी है — पुलमा देवी ने 2007 में फुलसनी गांव में ज़मीन खरीदी थी। रजिस्ट्री पक्की। लेकिन 2020 में वही ज़मीन किसी और को बेच दी गई। कागजों पर तो कमाल ही हो गया — जिस शख्स ने 2007 में ज़मीन बेच दी, उसके ही नाम पर 2019 में फिर से भूमिधरी चढ़ा दी गई।

“जब पुलमा देवी जनता दर्शन में पहुंचीं, तो उनकी आंखों में दर्द ही नहीं, आग भी थी। मैंने कहा — अब खेल खत्म!”
सविन बंसल, जिलाधिकारी देहरादून

डीएम का एक्शन ऐसा था कि विभागों में हड़कंप मच गया।

अधिशासी अभियंता (टिहरी बांध पुनर्वास) तक को डीएम ने आड़े हाथों लिया। इतना ही नहीं, घोर लापरवाही पर अधीक्षण अभियंता की सरकारी गाड़ी तक जब्त कर ली गई।

“मजबूरी और दर्द का फायदा उठाना अब बंद होगा। प्रशासन ने ठान लिया है कि दोषी बचेंगे नहीं।”
एक स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार

डीएम ने पूरा मामला एसडीएम अपूर्वा को अग्रेतर क्रिमिनल प्रोसेसिंग के लिए सौंप दिया है।

वर्षों से दबा फर्जीवाड़ा फाइलों में पड़ा था। डीएम की सख्ती से वह बाहर आ गया।

अब अवस्थापना पुनर्वास खण्ड ऋषिकेश ने तहसील विकासनगर को जमीन के मालिकाना हक की दुरुस्ती का पत्र भेजा। उसी दिन पुलमा देवी के नाम पर भूमिधरी चढ़ा दी गई।

“हमारे लिए ये जमीन ही घर, रोटी और इज्जत है। डीएम साहब भगवान बनकर आए।”
पुलमा देवी, फरियादी

यह कोई मामूली मामला नहीं। एक ही आदमी ने दो बार अपनी ज़मीन बेची। और सिस्टम की लापरवाही इतनी कि बिना जांच ही उसी के नाम ज़मीन फिर दर्ज कर दी गई।

डीएम की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है — “जब तक पीड़ित को इंसाफ नहीं मिलेगा, प्रशासन चैन से नहीं बैठेगा!”

🚨 अब सवाल है — कब तक कागजों में खेल चलता रहेगा? और कितने और पुलमा देवी इंसाफ के लिए दर-दर भटकेंगे?

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