वन विभाग ने मादा गुलदार को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा

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देहरादून। बालावाला और आसपास के क्षेत्रों में करीब एक महीने से दहशत फैलाने वाली मादा गुलदार को आखिरकार बृहस्पतिवार को वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया। मादा गुलदार काफी समय तक वन विभाग की रेस्क्यू टीम को छकाती रही। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने एक व्यक्ति के स्टोर रूम से गुलदार को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर पकड़ लिया। फिलहाल गुलदार को रायपुर वन रेंज में पशु चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है। बालावाला, शमशेरगढ़, नकरौंदा, नथुआवाला, तुनवाला, मियांवाला और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार की दस्तक से लोग दहशत में थे। गुलदार दिन के उजाले में ही कई बार आबादी क्षेत्र में लोगों को नजर आता था। इससे लोगों में दहशत का माहौल था। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से गुलदार को पकड़ने की मांग की थी।
डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला से भी गुहार लगाई गई थी। वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए एसडीओ उदयनंद गौड़ और रेंज अधिकारी राकेश नेगी के नेतृत्व में टीम गठित की थी। पिछले लगभग 10 दिन से टीम गुलदार को पकड़ने के लिए लोकेशन ट्रेस कर रही थी। लोगों की सूचना पर जब तक वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचती गुलदार वहां से दूसरी जगह चली जाती थी। बृहस्पतिवार को सुबह करीब नौ बजे लोगों ने वन विभाग को सूचना दी कि गुलदार शमशेरगढ़ सैनिक कालोनी के समीप तोर और चरी के खेत में मौजूद है। इस पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान दून चिड़ियाघर से पशु चिकित्सक डॉ. प्रदीप मिश्रा को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने गुलदार को चारों तरफ से जाल लगाकर घेरने की कोशिश की। इस बीच गुलदार इधर-उधर दौड़ लगाने लगी। वन विभाग की टीम और लोगों की भीड़ देखकर गुलदार शमशेरगढ़ में क्षितिज उपाध्याय के स्टोर रूम में घुस गई। दोपहर लगभग दो बजे टीम ने जाल लगाकर गुलदार को घेरा और डॉ. पवन मिश्रा ने उसे गन से ट्रैंकुलाइज (बेहोश) किया। वहां से गुलदार को पिंजड़े में बंद कर रायपुर रेंज में ले जाया गया। फिलहाल गुलदार को पशु चिकित्सकों की देखरेख में वहीं पर रखा गया है। मादा गुलदार करीब एक से डेढ़ वर्ष की है। वह खरगोश और मुर्गों को अपना निवाला बना रही थी। मादा गुलदार जब आबादी क्षेत्र में भाग रही थी, तो उससे बचने के लिए लोग भी इधर-उधर दौड़ते नजर आए। कई लोग छतों के ऊपर चढ़कर गुलदार की लोकेशन के बारे में शोर मचाते हुए वन विभाग की टीम को जानकारी दे रहे थे।

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