टायर जलाकर अंतिम संस्कार की थी तैयारी – घाट से वापस हुआ शव

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श्रीनगर गढ़वाल
रेलवे निर्माण उत्तरखंड के सपनों का प्रोजेक्ट है किन्तु इसके निर्माण मे लगी संस्था मजदूरो को इंसान तक मानने को तैयार नहीं है । कंपनी मे काम कर रहे मजदूर कि मौत के बाद आनन फानन मे उसका अंतिम संस्कार कर मामले को दबाने का प्रयास किया गया । आरोप है कि घाट पर हिंदू धर्म के अनुसार चिता तैयार किए बिना दो लकड़ी के साथ टायर पर रखकर मृतक मजदूर को जलाने कि तैयारी कि गई थी । सूचना मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने पुलिस बुलाकर घाट से बॉडी वापस मंगाई और पोस्ट मार्टम के बाद परिजनो के लिए मुआवजे कि मांग कि है । ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के अंतर्गत श्रीनगर के स्वीत गांव में चल रहे टनल निर्माण कार्य में कार्यरत एक मजदूर की मौत हो गई। मजदूर की मौत के बाद अन्य मजदूरों ने निर्माण कार्य बाधित कर मृतक के शव के साथ कार्यदाही संस्था के कार्यालय में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि सुरंग निर्माण कार्य में चालक वीर सिंह की तबियत खराब होने के बाद उपचार करने के दौरान उनकी मौत हो गई। जिसके बाद रेलवे परियोजना की कार्यदाई संस्था द्वारा आनन-फानन में मृतक के शव को अंतिम संस्कार के लिये शमशान घाट ले जाया गया, जब इसकी सूचना स्थानीय लोगों को मिली तो उन्होनें पुलिस को सूचना दी। जिसके बाद शव को घाट से वापस लाकर मृतक का पोस्टमार्टम किया गया। कंपनी में कार्यरत मजदूरों की मांग है कि मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा मिले, जिसपर कंपनी के अधिकारियों के साथ सहमति न बनने पर उन्होनें मृतक के शव के साथ कंपनी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

 

मौके पर किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिये पुलिस बल को भी तैनात किया गया है । देर रात तक चली बहस के बाद कंपनी द्वारा 6 लाख से बढाकर 10 लाख का मुआवजा मृतक परिवार को देने का फैसला लिया गया। जिसके बाद आक्रोशित मजदूरों ने अपना धरना खत्म किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी द्वारा बिना चिता बनाये, दो लकडीयों ओर टायरों में मृतक का अंतिम संस्कार करना सनातन धर्म के खिलाफ है, उन्होनें इसपर कार्यवाही की मांग की है।

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