लोकतंत्र का महायज्ञ शुरू!”उत्तराखंड पंचायत चुनाव की बिगुल वादन — दो चरणों में होगा मतदान, आचार संहिता लागू

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📍 देहरादून | Meru Raibar News | 21 जून 2025

“गांव से निकलेगा फैसला, लोकतंत्र की असली ताकत वही है।”
उत्तराखंड में पंचायत चुनावों का शंखनाद हो चुका है! निर्वाचन आयोग ने हरिद्वार को छोड़ बाकी 12 जनपदों की त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। अब हर गांव, हर पंचायत, हर प्रधान पद की लड़ाई शुरू — और साथ ही लोकतंत्र की सबसे जमीनी परीक्षा भी।


🗓️ मतदान की तारीखें तय: दो चरणों में होगा मतदान

  • पहला चरण: 10 जुलाई 2025
  • दूसरा चरण: 15 जुलाई 2025
  • मतगणना: 19 जुलाई 2025
  • नामांकन: 25 से 28 जून, सुबह 8 से शाम 4 बजे तक
  • नाम वापसी की अंतिम तिथि: 2 जुलाई, दोपहर 3 बजे तक
  • प्रतीक चिन्ह आवंटन: 3 जुलाई (पहला चरण), 8 जुलाई (दूसरा चरण)

जैसे ही अधिसूचना जारी हुई, राज्य में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। इसका मतलब अब हर घोषणा, हर रैली और हर खर्च पर रहेगी आयोग की पैनी नजर।


🧾 नामांकन से लेकर मतगणना तक – मिली गाइडलाइन की बारीक ट्रेनिंग

शनिवार को देहरादून नगर निगम हॉल में परियोजना निदेशक विक्रम सिंह ने सभी रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) को दिया पहला चुनावी प्रशिक्षण।
उन्होंने साफ कहा:
🗣️ “चुनाव की डोर आपकी ईमानदारी से बंधी है। हर कदम पर सच्चाई का दामन थामना होगा।”


📚 हर RO को मिली चुनावी जिम्मेदारी की बाइबिल

  • नामांकन पत्रों की बिक्री व जांच
  • प्रतीक चिन्ह आवंटन की प्रक्रिया
  • निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति में कार्रवाई
  • जाति प्रमाण पत्र की सख्त जांच — सिर्फ उत्तराखंड के अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी ही मान्य होगा

विक्रम सिंह ने खास ज़ोर दिया कि नामांकन पत्रों की जांच में लापरवाही नहीं चलेगी। RO और ARO को कहा गया कि हस्त पुस्तिका (मैनुअल) का गहन अध्ययन करें।


👥 देहरादून में दो चरणों में होंगे चुनाव

  • पहला चरण: चकराता, कालसी, विकासनगर
  • दूसरा चरण: डोईवाला, रायपुर, सहसपुर

हर ब्लॉक में चुनाव की गहमागहमी जल्द शुरू होने वाली है। गांव-गांव में खामोशियों के बीच धीरे-धीरे राजनीति की हलचल अब तेज़ हो रही है।


📌 एक चुनाव, हजार कहानियाँ

इन पंचायत चुनावों में न सिर्फ जनप्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया चल रही है, बल्कि यह भी तय होगा कि गांव की तरक्की की बागडोर किसके हाथ में होगी।
यह वही स्तर है जहां सरपंच की ईमानदारी या लापरवाही सीधे जनता की ज़िंदगी को प्रभावित करती है।


🧠 अंतिम पंक्ति — सोचने की बात:

“लोकतंत्र संसद से नहीं, पंचायत से मजबूत होता है।”
इस चुनाव में नारे नहीं, काम पर भरोसा करें।
इस बार… मताधिकार को मत बनाइए त्योहार का हिस्सा, बनाइए जिम्मेदारी का प्रतीक।


🖋️ रिपोर्ट: Meru Raibar News
📍 जमीनी हकीकत, आपकी जुबान में


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