उत्तरकाशी जिला पंचायत का अधूरा सच

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उत्तरकाशी जिला पंचायत पर भले ही आज दर्जनो  आरोप लग रहे है किन्तु  इसके इतिहास  पर  नजर दौड़ाए तो  आरंभ से ये विवादित नजर आती है ।  जिस पंचायत मे कभी  एक दिन के लिए तो कभी 7 दिनो के लिए कुर्सी बदल जाती हो वहाँ धरातल पर काम  कैसे होगा ये समझा जा सकता है ।  

उत्तरकाशी जिला पंचायत के अध्यक्षों  के कार्यकाल पर नजर डाले तो इसमे अध्यक्ष से ज्यादा प्रशासक की भूमिका नजर आती है कारण कुछ भी लेकिन मौजूयदा हालात मे इनका विश्लेषण बेहद जरूरी हो जाता है ।

 

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहले उतरकशी जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में राजेंद्र सिंह रावत का नाम आता है , जो 3 दिसंबर 1996 से 26 मार्च 2002 तक जिला पंचायत अध्यक्ष बने रहे

 

राज्य गठन के बाद भले ही राजेंद्र सिंह रावत जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर रहे हो लेकिन उनका चुनाव राज्य गठन से पहले हो गया था और उसके बाद भी एसके माहेश्वरी , नवीन चंद शर्मा , केके पंथ 3 -3  जिला अधिकारी 23 मार्च 2002 से 1 जून 2003 तक बतौर प्रशासक जिला पंचायत अध्यक्ष की गद्दी संभाल रहे थे।

इसके बाद उत्तरांचल राज्य का नाम बदल कर उत्तराखंड हो गया और उत्तराखंड बनने के बाद पहले जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का श्रेय नत्थी लाल शाह जी को जाता है जो 1 जनवरी 2007 से 3 जुलाई 2008 तक अपने पद पर बने रहे।  इसके बाद फिर से आर मीनाक्षी सुंदरम  , बीवीआरसी पुरुषोत्तम डीएम बतौर प्रशासक 13  10 2008 तक प्रशासक की जिम्मेदारी संभाले  रहे जिसके बाद अध्यक्ष के रूप में नारायण सिंह चौहान का निर्वाचन   जिहोने

14 10 2008 से लेकर…14 -10 2013 तक पंचायत का कार्यकाल पूरा किया ये अलग बात है की उस दौर मे भी एक गुट हमेसा इनसे दूरी ही बनाए रहा ।

इसके बाद 15 10 2013 से 11 8 2014 तक 3 जिलाधिकारी पंकज कुमार पांडे श्रीधर बाबू आधुयांकी  की और श्री रविशंकर ने बतौर प्रशासक पंचायत चलाई जिसके बाद 11 8 2014 को श्रीमती जसोदा राणा ने अध्यक्ष जिला पंचायत उत्तरकाशी की कुर्सी की कमान संभाली लेकिन विवाद यहां भी नहीं रुका

 

और अध्यक्ष पद पर 3 सदस्यों की समिति बैठाई गई जिसमें श्रीमती विमला नौटियाल श्रीमती अनीता भट्ट और श्रीमती पूनम शाह इन्होंने 13-5-2019 से 11-6-2019 तक अपना कार्यकाल पूर्ण किया जिसके बाद एक बार प्रकाश रमोला सिर्फ एक दिन के लिए अध्यक्ष  बनाए गए । बाद मे फिर जसोदा राणा कि  कोर्ट के आदेश के बाद वापसी हुई और 19-6-2019 से 9-7-2019 तक वे अपने पद पर बनी रही । 19 जून से लेकर 9 जुलाई तक करीब 20 दिन का कार्यकाल भी पूरा नहीं किया फिर से मामला कोर्ट में चला  गया इसके बाद एक महीने के लिए फिर से प्रकाश रमोला अध्यक्ष बने।

और फिर एक बार डीएम आशीष चौहान को प्रशासक बनाकर भेज दिया गया

कह सकते है कि पंचयत उतरकशी मे जो आग इन दिनो दिखाई दे रही है इसकी लकड़िया आरंभ से ही सुलग रही थी जिनमे से धुंवा भी दिखाई दे रहा था मगर उसे  जोसमठ आपदा कि तरह नजर अंदाज कर दिया गया

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