✨ लेखक गाँव में गूंजी कविता की अनुगूंज
देहरादून |
शुक्रवार की शाम देहरादून के थानों स्थित लेखक गाँव में कुछ अलग ही नज़ारा था। दीपों की उजास, सजे हुए मंच और सैकड़ों श्रोताओं के बीच जब कवियों की आवाज गूंजी तो पूरा वातावरण साहित्य, संस्कृति और संवेदना से भर उठा।
सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” के भव्य उद्घाटन के साथ यहां कविता, व्यंग्य और राष्ट्रभावना की ऐसी सरिता बही कि श्रोता देर तक मंत्रमुग्ध होकर तालियाँ बजाते रहे।

🔥 दीप प्रज्वलन के साथ उत्सव का आगाज़
इस सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय और लेखक गाँव, थानों देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यमंत्री ओम प्रकाश जमदग्नि, पारिस्थितिकी पर्यटन परिषद के उपाध्यक्ष, गणेश खुगशाल ‘गणी’, डॉ. सर्वेश उनियाल और केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
दीपों की रोशनी के साथ ही मंच पर शुरू हुआ कविता और विचारों का अद्भुत संगम।

🎤 कवियों ने शब्दों से रचा जादू
देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी ओजस्वी और व्यंग्यात्मक रचनाओं से माहौल को जीवंत बना दिया।
दिल्ली से आए ओज कवि डॉ. रसिक गुप्ता की पंक्तियों ने श्रोताओं के दिलों में देशभक्ति की लहर जगा दी—
“पथ प्रदर्शक बनी युगों से है कलम की धार ही,
जन्म भारत में मिले, हम कवि बनें हर बार ही।”
उत्तर प्रदेश के डॉ. अर्जुन सिसोदिया ने समसामयिक व्यंग्य से समाज की विडंबनाओं पर तीखा कटाक्ष किया—
“चिंगारी जहाँ-जहाँ दीखे ले जाकर आँधी रखते हो,
सीने में नफरत रखते हो, होठों पर गाँधी रखते हो।”
🌸 नारी शक्ति और देशभक्ति की गूंज
दिल्ली की कवयित्री सरला मिश्रा ने नारी शक्ति पर भावपूर्ण पंक्तियाँ सुनाकर सभागार को भावुक कर दिया—
“प्रभु की एक अलौकिक रचना, दो कुलतारी है,
सृष्टि का आधार जगत में, होती नारी है।”
वहीं उत्तराखंड की डॉ. ऋतु सिंह ने देशभक्ति से भरी पंक्तियाँ सुनाईं—
“अपनी आँखों में ख्वाबों की बारात है,
सरहदों पर सिपाही जो तैनात है।”
इन कविताओं पर सभागार तालियों की गूंज से बार-बार गूंजता रहा।
😄 हास्य और व्यंग्य से गूंज उठा सभागार
दिल्ली से आए श्रीकांत श्री ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचना से दर्शकों को खूब गुदगुदाया—
“भले ही दीप से पूजा तू आठों याम मत करना,
मिले कोई मोहल्ले में तो राधेश्याम मत करना…”
कवियों की हर पंक्ति पर तालियों और ठहाकों की बरसात होती रही।
🎭 सात दिन तक चलेगा संस्कृति का उत्सव
कार्यक्रम का संचालन शिवम ढौंडियाल ने किया। इस दौरान केंद्र के प्रतिनिधि राजकुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आने वाले सात दिनों तक इस उत्सव में कला, साहित्य, लोकसंस्कृति और संगीत के विविध रंग देखने को मिलेंगे।
✨ शब्दों से जगती है संस्कृति की रोशनी
लेखक गाँव की इस शाम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कविता सिर्फ शब्द नहीं होती… वह समाज की आत्मा होती है।
जब मंच पर कलम बोलती है…
तो विचारों की रोशनी दूर तक फैलती है।
