— नवजात को सड़क किनारे छोड़ने वाले निकले वही लोग जिन्होंने पुलिस को दी थी सूचना!
“माँ-बाप ने ही छोड़ा अपनी कली को सड़क पर…”
— पुलिस की सूझबूझ और संवेदनशील जांच ने खोली दिल झकझोर देने वाली सच्चाई।
👉 दो दिन की मासूम, सड़क किनारे तड़पती मिली।
👉 पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन की त्वरित कार्रवाई।
👉 सीसीटीवी ने खोला राज – सूचना देने वाले ही निकले बच्ची के माता-पिता।
👉 प्रेम-प्रसंग, पारिवारिक दबाव और एक अमानवीय निर्णय!
शुरुआत मासूमियत की…अंत कटु सच्चाई में!
देहरादून के क्लेमेंटटाउन में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।
03 जुलाई की रात पंत मार्ग के पीछे एक नवजात बच्ची सड़क किनारे लावारिस हालत में मिली। बच्ची सांस ले रही थी, लेकिन बेहद कमजोर और कांपती हुई।
“हमें सड़क के किनारे बच्ची मिली है, जल्दी आइए…”
— यही कॉल चाइल्ड हेल्पलाइन पर आई थी। और इसके बाद जो सामने आया, उसने सबको चौंका दिया।
SSP देहरादून की संवेदनशील पहल, तुरंत एक्शन में आई पुलिस
एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन ने नवजात को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद उसे शिशु निकेतन भेजा गया।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगाले — और यहीं से शुरू हुआ सच का खुलासा।
जिसने बताया, उसी ने छोड़ा!
सीसीटीवी में एक स्कूटी पर युवक-युवती दिखाई दिए — जो बच्ची को वहां छोड़ते और चले जाते हैं।
फोन नंबर की जांच की गई, तो पता चला कि यही लड़का पुलिस को सूचना देने वाला था!
पुलिस ने जब उसे बुलाया और सख्ती से पूछताछ की, तो सन्न कर देने वाला सच सामने आया —
“वो बच्ची मेरी और मेरी प्रेमिका की है…”
प्यार, समाज का डर… और एक अमानवीय फैसला!
युवक और युवती पिछले दो साल से रिश्ते में थे। युवती एक निजी कॉलेज में पढ़ती है।
2 जुलाई को युवती ने एक बच्ची को जन्म दिया।
परिवार और समाज के डर से दोनों ने उस मासूम को सड़क किनारे छोड़ दिया — और फिर खुद ही पुलिस को सूचना दी, ताकि शक न हो।
“यह घटना केवल एक अपराध नहीं, एक सामाजिक पीड़ा भी है।
क्या प्यार में जन्म लेने वाली जान इतनी बेबस हो सकती है?”
पुलिस ने की काउंसलिंग, आगे की कार्रवाई जारी
दोनों से पूछताछ के साथ-साथ परिजनों को भी बुलाया गया है। काउंसलिंग जारी है, और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
💔 सोचने की बात:
इस समाज में जहां बच्चियों को लक्ष्मी कहा जाता है, वहीं उन्हें इस तरह लावारिस छोड़ देना — क्या यह हमारे नैतिक पतन की निशानी नहीं है?
**📢 आपका क्या कहना है? क्या ऐसे मामलों में सख्त सजा होनी चाहिए? या ऐसे युवाओं को सुधार का मौका? अपनी राय कमेंट में ज़रूर दें! **
