जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तारीकरण की वर्षों पुरानी गुत्थी सुलझी – जिला प्रशासन ने मात्र 3 दिन में निकाली 87 हेक्टेयर ज़मीन

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गिरीश गैरोला


देहरादून, 02 मई
राज्य की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में शुमार जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तारीकरण योजना को आखिरकार नया मोड़ मिल गया है। वर्षों से अधर में लटकी इस योजना को जिला प्रशासन ने तीन दिन के भीतर निर्णायक दिशा दे दी है। जिला प्रशासन ने 87 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर वर्षों पुरानी इस गुत्थी को सुलझा दिया है।

डीएम सविन बंसल की अगुवाई में हुआ निर्णायक कार्य
ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट जल्द ही अंतरराष्ट्रीय रूट मैप का हिस्सा बने, इसके लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जाए। उन्होंने यह भी दोहराया कि यह परियोजना माननीय प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है, अतः इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है।

85% से अधिक भूमि अधिग्रहण कार्य पूर्ण
बैठक में बताया गया कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए अब तक 85 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसमें 43 परिवार एवं 93 काश्तकार शामिल हैं। कुछ छोटे प्लॉट्स को अज्ञात रूप में दर्ज किया गया है, जिसके लिए पिछले तीन वर्षों की रजिस्ट्री का विवरण एसडीएम डोईवाला से तलब किया गया है।

प्रभावित परिवारों का सत्यापन और मुआवजा निर्धारण पूर्ण
डीएम ने बताया कि प्रभावित परिवारों का पूर्ण सत्यापन और मुआवजा निर्धारण कराया जा चुका है। साथ ही, मुआवजा बाजार दर पर देने की मांग पर विचार करते हुए एसडीएम डोईवाला व सब रजिस्ट्रार की सदस्यता वाली विशेष समिति का गठन कर दिया गया है।

भूमि के बदले भूमि की मांग पर रिपोर्ट तलब
प्रभावितों की “भूमि के बदले भूमि” की मांग पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को मानकों के अनुरूप रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं ताकि विस्थापन कार्यों को न्यायोचित तरीके से अंजाम दिया जा सके।

बैठक में मौजूद रहे अधिकारी
इस अहम बैठक में एसएलओ स्मृता परमार, पुलिस अधीक्षक सदर जया बलूनी, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, एसडीएम अपूर्वा सिंह समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


Meru Raibar  की विशेष टिप्पणी:
जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिलाना केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि समूचे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी और पर्यटन के लिए ऐतिहासिक कदम होगा। ज़िला प्रशासन की यह तेज़ रफ्तार पहल इस दिशा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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