उत्तरकाशी – फॉरेस्ट क्लेयरेंस मिलने के बाद भी 2014 से सड़क निर्माण की डीपीआर शासन मे अटकी -सीएम त्रिवेन्द्र ने भी तोड़ी उम्मीद

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पहाड़ो मे विकास की रीड मनी जाने वाली सड़क के लिए अक्सर ग्रामीणो को वन भूमि लैंड ट्रान्सफर के लिए धरना प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है किन्तु उत्तरकाशी जिले की यमुनोत्री विधानसभा मे 5 किलोमीटर सड़क के लिए वर्ष 2014 मे स्वीकृति मिलने के पश्चात वन भूमि के हस्तांतरण की सैद्धांतिक एवम विधिवत स्वीकृत वर्ष 2016 में प्राप्त हो गयी थी | ग्रामीणो का आक्रोश  इस बात को लेकर है की सड़क निर्माण के लिए 5 करोड़ की डीपीआर आज तक स्वीकृत नहीं हो सकी है | जिसके लिए ग्रामीण खुरमोला मे 25 नवंबर से क्रमिक अनसन पर बैठे है |

यमनोत्री विधान सभा मे सड़क की मांग को लेकर धरना

सोमवार को  को ग्राम प्यांसारी के ग्रामीणों द्वारा काली मंदिर रामनगर पयांसारी के मैदान मे में छठे दिन भी धरना जारी रहा
धरना कार्यक्रम गंवा नाग मोटर मार्ग के स्यालना से पयांसारी से होते हुए ब्रह्मखाल जुनगा मोटर मार्ग तक मार्ग की स्वीकृत के संबध में चलाया जा रहा है
गंवानाग मोटर मार्ग से पयांसारी होते हुए ब्रह्मखाल जुनागा मोटर मार्ग तक मार्ग निर्माण की प्रथम स्वीकृति 5 किलोमीटर लंबाई में 24 मीटर स्पान के पुल सहित वर्स 2014 में रुपए 89,00 लाख की प्राप्त हुई थी,
मार्ग के संरेखण का विधिवत अनुमोदन के पश्चात वन भूमि के हसाथनतरण की सैद्धांतिक एवम विधिवत स्वीकृत वर्ष 2016 में प्राप्त हो चुकी
मार्ग पर पड़ने वाले पेड़ो का कटान भी 2016,17 में किया जा चुका है

मार्ग की डीपीआर उत्तराखंड सरकार को प्रेषित है, ओर स्वीकृति हेतु लंबित है,
डीपीआर स्वीकृति हेतु दिनांक 14,10,2020 को माननीय मुख्मंत्री मंत्री उत्तराखंड सरकार एवम अन्य को विधिवत नोटिस ग्राम वासियों द्वारा दिया गया, किन्तु नोटिस पर एक माह पश्चात भी कोई कार्यवाही न होने पर ग्रामवासी पूर्व प्रेषित ज्ञापन के अनुरूप रामनगर पयासारी में धरने पर बैठ गए थे किन्तु शासन प्रशासन द्वारा ग्रामीणो की मांगो पर कोई ध्यान नहीं दिये जाने से गुस्साये ग्रामीणो ने अपने धरने  को अनसन मे बदलने और आत्मदाह जैसे घातक कदम उठाने की चेतावनी दी है|

धरणे पर बैठे महावीर रावत और तरेपन सिंह कुमाई ने बताया कि 2022 से पूर्व प्रदेश सरकार ने किसानो कि आय को दो गुना करने का जो लक्ष्य रखा है उसे पूरा करने के लिए सड़क निर्माण बेहद जरूरी है | उत्तराखंड के चार धाम यात्रा के प्रथम पड़ाव यमनोत्री कि तरह इसके दर्जनो गाव आज भी सड़क मार्ग कि बाट  जोह रहे है


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