सिक्योर हिमालय परियोजना के तहत जनपद उत्तरकाशी में क्रियान्वित ग्रीन रिक्वरी पाथवे फार इंडिया पाइलेट परियोजना( वन हैल्थ) के तहत गुरुवार को नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एन0आई0 0एम) में मुख्य विकास अधिकारी श्री गौरव कुमार की मौजूदगी में शुभारंभ किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य जनपद में जूनोटिक रोगों के संचरण, बचाव और निदान के बारे में हितधारको, फ्रांट लाइन र्वकरों, स्थानीय लोगों को जागरूक करना है।
कार्यशाला में मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद में चल रहे वन हैल्थ पाइलेट परियोजना में हो रहे कार्याे की प्रशंसा की और कहा कि जूनेाटिक रोगों बचाव के बारे में स्थानीय लोगों को जानकारी होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशाला मानव स्वस्थ्य को सुरक्षित करने एवं जूनोटिक रोगों कि पहचान एवं समय पर निदान से आजीविका को सुरक्षित करने हेतु कार्यशाला के आयोजन महत्वपूर्ण है ।
कार्यशाला में उपस्थित सहायक चिकित्साधिकारी डा0 विपुल श्रीवास्तव ने कहा जूनोटिक रोग जो कि पशु से मानव विभिन्न माध्यमों से फैलते है जैसे संकमित जल के प्रयोग, कच्चा मांस सेवन, संक्रमित जानवार संर्पक में आने आदि से संचरित होती हैं l साथ ही उन्होंने जूनोटिक रोगों रेबीज, बू्रसिला,ऐनथे्रक्स, लेपटोस्पाइरासिस, आदि जूनोटिक रोगों के बारे में विस्तृत जानकरी साझा किया ।
कार्यशाला में वन हेल्थ विषय पर शोध कर रहे कोहाट् संस्था, केरला राज्य के डा0 अन्नतू कृषननं द्वारा जनपद में वन हैल्थ के बेस लाइन सर्वे के दौरान एकत्रित किये गये आकडों के आधार पर अति संवेदनशील चिन्हित क्षेत्रों एवं उन स्थानों पर पाये जाने वाले जूनोटिक रोगों के बारे में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अवगत कराया।
डा0 भरत ढोढियाल मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी (नोडल वन हैल्थ पाइलेट परियोजना) उत्तरकाशी में विभाग द्वारा जूनोटिक रोंगों से बचावा हेतु जनपद में संचालित योजनाओं से अवगत कराया साथ ही उनके द्वारा बताया गया कि जनपद में प्रथम बार जूनोटिक रोग ब्रूसेला का टिकाकरण किया गया है जो कि भविष्य में इस रोग के बचाव में मददगार होगा।
परियोजना सहायक, सिक्योर हिमालय परियोजना उमेद धाकड ने वन हैल्थ की अवधारणा से समस्त हितधारकों, स्थानीय समुदाय को अवगत करते हुये इसके राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे कार्यों एवं द्रष्टिकोण के बारे में प्रस्तुूतीकरण दिया तथा भू – क्षेत्र स्तर पर इस परियोजना से सम्बधित हितधारकों को परियोजना को सफल बनाने हेतु सहयोग की अपेक्षा कि गई।
कार्यशाला में पशुचिकित्सा अधिकारी डा0एस0एन0 पाठक भटवाड़ी ,डा0 योगिता, डा0 मीनाक्षी, डा0 र्धमेन्द्र इत्यादि अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में पशुचिकित्सा आधिकारीयों के साथ भटवारी, डुंडा विकास खण्ड के लगभग 70 लोगों ने प्रतिभाग किया।
