उत्तरकाशी
कोरोना के पहले लौक डाउन में आम लोगो का पीएम मोदी को इतना भरपूर समर्थन मिला कि बेवजह या किसी वजह से बाजार में घूम रहे लोगो की नियम विरुद्ध पिटाई और उसके बाद उनके विडियो सोसल मीडिया पर वायरल करने के बाद भी न तो कार्यपालिका, न न्याय पालिका और न व्यवस्थापिका ने इसका कोई सज्ञान लिया | चौथे स्तंभ ने भी सोसल मीडिया पर वायरल बर्बरता के साथ पिटाई के इन विडियो को खूब चटखारे के साथ खबर का हिस्सा बनाया | मकसद साफ़ था कि लोग कोरोना की चेन तोड़ने में किये गए हर प्रयास में पीएम मोदी के साथ खड़े दिख रहे थे | संक्रमण की इस दूसरी लहर में स्थिति इसके उलट है |
पिछली दफा बेरोजगार हुए लोग इस बार भी पूर्व कि स्थिति को सोचकर ही कांप जाते है |भूखे पेट कई किमी की पैदल यात्रा को सपने में भी याद नहीं करना चाहते है | जनता की इस टीस को समझते हुए सरकारों ने उत्तराखंड में भी लौक डाउन लगाने और उस पर इम्प्लेमेंट को लेकर सभी अधिकारी जिले के डीएम को दे दिए है | वही पिछले कोरोना काल के खौफ का कुछ लोग इस बार आर्थिक फायदा उठाने की कोसिस में जुट गए है | बाजार में बड़ो जोरो से अफवाह उड़ाई जा रही है कि बंगाल चुनाव की मतगणना के बाद उत्तराखंड में पहले की तर्ज पर लम्बा कर्फ्यू अथवा लौक डाउन लगने वाला है| इस अफवाह से सबसे ज्यादा परेसान यहाँ का मजदुर वर्ग है जो इस खौफ के बाद किसी भी तरह अपने घर गाव सकुशल पहुचंता चाहता है | ऐसे में कुछ लोग ट्रेवल्स कंपनी से सेटिंग कर इन्हें विहार, उत्तरप्रदेश और अन्य प्रदेश में भेजने की व्यवस्था के नाम पर अच्छी रकम ऐंठ रहे है | ट्रेवल्स कंपनी चलाना और अपने ग्राहक पटाना कोई अपराध नहीं है , पर किसी को गुमराह कर अपने धंदे को चलाना गलत है | मजदूरो द्वारा आधे काम छोड़कर चले जाने का असर लोकल बाजार पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है | बाजार में ठेली- फड़ी और अस्थायी दुकान लगाकर अपने घर की आजीविका चलाने वाले भी इसको लेकर सकते में है और अपने घर गाव जाने किए लिए पूछ ताछ में जुट गए है | हैरानी की बात ये है कि कोरोना गाइड लाइन,टीकाकरण और संक्रमण के सिंटमस कि बात आम लोगो तक पहुचे या नहीं पर अफवाह बहुत ही आसानी से पहुच जाती है |
उत्तरकाशी डीएम मयूर dixit ने बताया कि फिलहाल ऐसा कोई इनपुट नहीं है कि 2 मई के बाद लौक डाउन लगने वाला है | उन्होंने कहा कि बिना वजह अफवाह फ़ैलाने वालो की पहिचान कर कार्यवाही की जाएगी | इसके बाद भी अगर यह अफवाह सच निकलती है तो भविष्य में भी लोग प्रशासन से मिली सुचना को छोड़कर बाजार में चल रही अफवाहों पर ही ज्यादा भरोषा करेंगे | लिहाजा जो प्रवासी मजदुर जिलो में है उनकी पूर्ण जिम्मेदारी और मजदूरो कि संख्आंया का आंकड़ा अभी से जिला प्रशासन को तैयार करना होगा ताकि आग लगने पर कुंवा खोदने पुरानी आदत पर ब्रेक लग सके
