उत्तरकाशी : इस बार महाभारत की तर्ज पर होगा गंगोत्री का रण – अपनों के खिलाफ गाँडीव उठाएगा आज का अर्जुन

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तमन्ना जाग गयी विधायक बनने की

देश मे लगातार मजबूत हो रहे बीजेपी संगठन और परदेशो मे बदलते सरकार के चेहरो के बाद बीजेपी ने अपने कार्यकर्ताओ को एक संदेश जरूर देने का प्रयास  किया है,  कि इस पार्टी मे रहते हुए किसी अंतिम छोर मे बैठे कार्यकर्ता को भी कभी बड़ी ज़िम्मेदारी मिल सकती है |

धामी के सीएम बनने से बढ़ी उम्मीद

उत्तराखंड मे सीएम की दौड़ मे पुराने अनुभवी नेताओ कि फ़ौज  को दरकिनार करते हुए जिस तरह से बीजेपी आलाकमान ने पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री की  कुर्सी  सौंप कर उसे अचानक सामान्य विधायक से वीवीआईपी बना दिया,  उससे बीजेपी संगठन मे अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी अब महसूह होने लगा है कि  पार्टी मे रहते हुए कभी उसका भी नंबर आ सकता है |

गंगोत्री का मिथक कैसे रहेगा कायम

उत्तराखंड मे सरकार बनाने वाली गंगोत्री विधान सभा क्या इस बार भी मिथक को बनाए रखेगी ? दरअसल गंगोत्री से चुनाव जीतने वाले विधायक के दल की  ही अब तक प्रदेश मे सरकार बनती आयी  है, और  आजतक यही मिथक कायम रहा है |

बीजेपी

बीजेपी से सभी दावेदार खुद को मान रहे आलाकमान की पसंद

इस बार गंगोत्री से विधायक गोपाल रावत के   असमय निधन के बाद दावेदारों की लंबी फौज खड़ी हो गयी है | एक तरफ पिछले विधान सभा चुनाव मे टिकट न मिलने से बागी चुनाव लड़े सीनियर लीडर और वक्ता  सूरत राम नौटियाल की फिर से बीजेपी मे वापसी हो गयी है,  वही कॉंग्रेस मे उपेक्षा झेल रहे पूर्व प्रमुख सुरेश चौहान भी टिकट की उम्मीद मे पिछले चुनाव मे बीजेपी का दामन  थाम चुके है और इस बार अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे है |

बीजेपी के युवा नेता पवन नौटियाल भी इस बार टिकट मिलने को लेकर आसवस्त दिखाई देते है |

इसी दौरान दो बार भटवाडी से अपनी पत्नी को प्रमुख का चुनाव जिता चुके बीजेपी के नेता जगमोहन रावत भी इस बार गंगोत्री से अपना टिकट क्लियर मानकर चल रहे है |

गंगोत्री से पुजा अर्चना कर जगमोहन रावत ने किया बड़ा ऐलान

जगमोहन रावत प्रमुख भटवाडी विनीता रावत और अपने कुछ खास समर्थको के साथ गंगोत्री धाम पहुचे पुजा अर्चना के बाद उन्होने गंगोत्री विधान सभा से टिकट के लिए अपना दावा पेश कर दिया | इस बार गंगोत्री के रण  मे गुरु- चेले और नाते –रिश्तेदार, दोस्त- यार सब महाभारत युद्ध की तरह आमने  सामने खड़े दिखाई दे रहे है , और मतदाता जनता अर्जुन की तरह असमंजस मे खड़ी है कि वो किस करवट बैठे |

ऐसे मे गंगोत्री को इस बार राजनैतिक रूप से दक्ष श्री कृष्ण की  जरूरत है जो खुद तो हथियार ण उठाने की सौगंध ले पर पांडवो की  भीड़ से एक अर्जुन को  तलाश कर जनकल्याण के लिए उसे गाँडीव उठाने की  कला मे माहिर कर सके |     

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