उत्तरकाशी : इस बार विधान सभा चुनाव मे नेताओ का तोल करेंगे व्यापारी ?

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रविवार को प्रांतीय  उद्धोग व्यापार  प्रतिनिधि मण्डल का जिला सम्मेलन  उत्तरकाशी के ग्रेट  गंगा होटल मे सम्पन्न हुआ |  सम्मेलन मे बतोर मुख्य अतिथि सामिल हुए प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा और प्रदेश महामंत्री प्रकाश मिश्रा ने जिले के व्यापारियो से उनकी स्मस्याओ को सुनकर प्रदेश स्तर पर उठाने का भरोषा दिया    

कोरोना काल की लंबी अवधि बीतने के बाद उत्तराखंड का प्रांतीय उधयोग व्यापार प्रतिनिधिमंडल मण्डल सभी जिलो मे भ्रमण कर अपनी इकाइयो से व्यापारियो की दिक्कतों का संकलन कर प्रदेश सरकार को ज्ञापन देने जा रही है | गौरतलब है कि व्यापार  मण्डल गैर राजनैतिक संगठन होने के चलते भले ही प्रत्यक्ष  रूप से चुनावी राजनीति मे हस्तक्षेप नहीं करता है,  किन्तु प्रदेश का बड़ा संगठन होने के नाते समाज  के एक बड़े वर्ग को सीधे तौर पर प्रभावित करता है | कोई भी राजनैतिक कार्यक्रम बिना व्यापारमंडल के सहयोग के सफल नही माना जाता है | राजनैतिक दलो  के आह्वान पर किए जाने वाले बाजार बंदी की  सफलता से ही आंदोलन सफल माना  जाता है,  वही इस बंदी के दौरान आर्थिक नुकसान झेलने वाले व्यापारी की उपेक्षा कर दी जाती है |

प्रदेश महामंत्री प्रकाश मिश्रा ने बताया कि अपनी दिक्कतों और समस्याओ के लिए व्यापार मण्डल की प्रदेश इकाई 22 सूत्रीय मांग पत्र सरकार को सौंपने जा रही है ,  ताकि आने वाले विधान सभा चुनाव 2022 मे सभी चुनाव लड़ने वाले दल इन मांगो को अपने चुनावी  घोषणा पत्र मे सामिल कर सके |

वही उत्तरकाशी चिन्यालीसौड व्यापार मण्डल के अध्यक्ष अमित सकलनी ने ऑनलाइन मार्केट से स्थानीय व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए तंजा कसा कि जो  सरकार ऑनलाइन बाजार को बढ़ावा दे रही है वह  वोट भी ऑनलाइन ही प्राप्त करने की व्यवस्था  करे | इसके अलावा उन्होने बिना पहिचान पत्र और पंजीकरण के जिले से गाँव गाँव तक घूम रहे फेरि लगाकर व्यापार करने वालों पर कोई अंकुश नहीं लगाए जाने पर नाराजी व्यक्त कि है | उन्होने बताया कि कोरोना काल मे अपनी दुकानों को बंद रखकर अथवा संक्रमण कि चिंता छोड़ आम लोगो को राशन बांटने के दौरान  सबसे अधिक प्रभावित होने वाले व्यापारी को न तो कोरोना वारियार माना गया और न टीका कारण मे कोई प्राथमिकता दी गयी |    

प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा ने कहा कि कि पूरे देश के मददाताओ मे सबसे बड़ा वर्ग व्यापारियो का ही  है और उसमे व्यापारियो के परिवार वालों को भी जोड़ दिया जाय तो आंकड़ा 5 गुना पहुच जाता है ऐसे मे किसी भी सरकार को व्यापारियो  की  उपेक्षा करना भारी पड़  सकता है

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