उत्तरकाशी : इस बार कौन बनेगा गंगोत्री का लाल – राजनीति का बिगड़ैल कौन नेता मतदाता ?

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कॉंग्रेस की टक्कर मे बीजेपी के दर्जन भर दावेदार

वर्षो पुराना मिथक है कि गंगोत्री विधान सभा सरकार बनाती है| राज्य निर्माण के बाद से प्रदेश मे बीजेपी और कॉंग्रेस बारी – बारी से सत्ता संभालती आयी है , और गंगोत्री की  सत्ता पर भी गोपाल और विजयपाल एक के बाद एक काबिज होते रहे है | राजनीति मे आकार दो मित्र बिपक्षी दलो मे रहकर भी पक्ष – विपक्ष की मित्रता निभाते रहे और एक दूसरे की जीत और हार का भी  कारण भी बनते रहे | गंगोत्री की जनता ने  खुस होकर नहीं एक से नाराज होकर हमेसा  दुसरे प्रत्यासी को वोट दिया |

 इस कार्यकाल को पूर्ण करने से पहले ही गंगोत्री से बीजेपी विधायक गोपाल रावत का असमय निधन हो गया , जिसके बाद गंगोत्री की सत्ता का समीकरण ही बदलता हुआ प्रतीत होने लगा है | अब मतदाता असमंजस मे है कि  किसकी नाराजी किस पर उतारे |

गंगोत्री विधान सभा से कॉंग्रेस के पास सिर्फ विजयपाल सजवान के रूप मे सिर्फ एक ही देवदार है, जबकि बीजेपी के पास दर्जन भर दावेदार टिकट की दौड़ मे खड़े  है |

इस बार महंगा होगा चुनाव ?

 मजेदार बात तो ये है कि अभी टिकट फ़ाइनल भी नहीं हुआ और दावेदारों ने चार महीने पहले से ही चुनाव प्रचार अभियान सुरू कर दिया है | पिछले चुनाव के दौरान एक महीने के दौरान ही भागम – भाग के बीच प्रत्यासी मतदाताओ के बीच जन संपर्क भी करता था और कार्यकर्ता चुनाव प्रचार भी | अब चार महीने पहले से चुनाव प्रचार सुरू होने से दावेदारों का खर्च भी बढ़ गया है जाहिर  है कि महंगे  चुनाव का खर्च भी जनता के ही सर पर फूटने वाला है |

बड़ा सवाल ये कि गंगोत्री से दर्जन भर टिकट के दावेदारों मे से सिर्फ एक के नाम पार्टी का टिकट तय  होगा तो बाकी के लोग क्या आसानी से इसे पचा लेंगे ?

चलिये एक- एक करके सभी दावेदारों की  जन्म कुंडली चुनावी फलादेश के साथ आपको दिखाते है | ताकि दावेदारों को विकास की कसौटी पर कसने के बाद ही मतदाता कोई फैसला ले सके |

टिकट के दावेदारों मे बीजेपी के युवा चेहरे मे सबसे पहले पवन नौटियाल है | प्रदेश मे बीजेपी यूथ से निकले युवा मुख्यमंत्री धामी के सत्ता संभालते ही युवाओ की  भी ऊमीदे बढ़ गयी है | पवन उम्र मे भले ही छोटे  नजर आते हो किन्तु इतनी कम उम्र मे भी 17 साल संघ को देकर पर्याप्त अनुभव जुटा चुके है और आरएसएस के काफी निकट माने जाते है |

खास बात ये है कि प्रदेश मे पलायन पर बड़े बड़े चिंतन भाषण देने वाले नेता खुद अपने गाँव से पलायन कर चुके है जबकि पावन नौटियाल आज भी अपने गाँव  मे डटे है |

गाँव मे गौपालन के साथ खेती बाड़ी और साग शब्जी  भी पैदा करते है | पवन ने ग्रामीण परिवेश मे रहने के बाद भी शहरी लोगो को अपने ही गाँव मे आने को मजबूर कर दिया है | पवन अपने परिवार के साथ हिटाणु मे तकनीकी संस्थान संचालित कर रहे है, जिसमे पोली टेक्निक, बीएड, नरशिंग बीएएमएस जैसे कोर्स संचलित हो रहे है |   यहा से निकले हुए सैकड़ो  छात्र सरकारी और निजी संस्थान मे सेवा देकर रोजगार पा रहे है |  इसे पवन अपनी उपलब्धि भी मानते है | आज इस संस्थान के चलते गाँव मे शहरो जैसी चहल – पहल है शिक्षक और छात्र गाँव मे ही किराए पर कमरा लेकर मंजीरा देवी संस्थान मे पढ़ाई करते है, जिसके चलते आसपास के लोगो को किसी न किसी रूप मे रोजगार भी मिल रहा है |

इतना ही नहीं पवन बताते है कि जल्द ही इंटर तक कि शिक्षा के लिए मान्यता मिलने वाली है जिसके बाद कक्षा एक मे प्रवेश लेने के  बाद छात्र तकनीकी संस्थान की  डिग्री लेकर ही बाहर निकलेगा |

गंगोत्री का खेवनहार कौन होगा ये मतदाताओ को तय करना है किन्तु किसी भी फैसले पर पहचने से पहले सभी दावेदारों का रिकॉर्ड उनके सामने होगा तो अच्छे प्रत्यासी का चयन हो सकेगा ताकि चौक चौराहो पर लोग सिर्फ सरकारो को दोष न दे सके और सोच समझकर ही प्रत्यासी का चयन कर सके | एक रिपोर्ट     

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