उत्तरकाशी ; विश्व गौरैया दिवस – गंगा किनारे नारियल के रेशों से निर्मित कृत्रिम घोंसले लगाए

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आज गंगा विश्व धरोहर मंच के सदस्यों ने गंगा तट पर गंगा आरती स्थल पंजाब सिंध क्षेत्र के आस- पास नारियल के रेशों से निर्मित कृत्रिम घोंसले लगाये। यह अभियान 20 मार्च 2021 विश्व गौरैया दिवस तक चलाया जायेगा ताकि गंगा तटों सहित अन्य स्थानों व घरों में मानव निर्मित घोंसले लगवाकर गौरैया संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। कार्यक्रम संयोजक डाॅ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने कहा कि गौरैया का कम या विलुप्त होना इस बात का संकेत है कि प्राकृतिक आवास तेजी से सिमट रहे हैं जबकि गौरैया जैसे जीवों का अस्तित्व पर्यावरण व पारिस्थितिक तंत्र के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

पीजी कालेज रसायन विभाग के प्राध्यापक डाॅ. तिलक राम प्रजापति ने कहा कि गौरैया इंसान की सच्ची दोस्त भी है और पर्यावरण संरक्षण में उसकी खास भूमिका है। आज इंसान की भोगवादी संस्कृति ने उसे हमसे दूर कर दिया है। शहर से लेकर गांवों तक मोबाइल टावर एवं उससे निकलते रेडिएशन से इनकी जिंदगी संकट में फंस गयी है साथ ही खेती-किसानी में रसायनिक उर्वरकों का बढ़ता प्रयोग बेजुबान पक्षियों और गौरैया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। सेवानिवृत प्राचार्य सुरेन्द्र दत्त उनियाल ने कहा कि हमें गौरैया के घोसलों के लिए सुरक्षित जगह पर लगाकर उन्हें प्राकृतिक वातावरण देना होगा। क्योंकि आधुनिक बनावट वाले मकानों में गौरैया को अब घोंसले बनाने की जगह ही नहीं मिलती। जहां मिलती है, वहा हम उसे घोंसला बनाने नहीं देते। अपने घर में थोड़ी-सी गंदगी फैलने के डर से हम उसका इतनी मेहनत से तिनका-तिनका जुटाकर बनाया गया घर उजाड़ देते हैं। इससे उसके जन्मे-अजन्मे बच्चे बाहर परभक्षियों का शिकार बनते हैं। गंगा आरती समिति के पदाधिकारी चन्द्र शेखर भट्ट व नेहरू युवा केंद्र नमामि गंगे के परियोजना अधिकारी उत्तम पंवार ने इस अभियान की सराहना की व सहयोग करने के लिए आगे आये। इस अवसर पर रोहित कुमार, प्रवेश पंवार, अजय पाल, आदर्श डंगवाल, शिव गोपाल उनियाल, दुर्गेश तथा दीपक आदि उपस्थित थे।

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