🩸देहरादून हाईकोर्ट में मानवता की मिसाल! | न्यायाधीशों ने बढ़ाया हाथ, दिया जीवन का तोहफ़ा
“रक्तदान — एक ऐसा न्याय, जो ज़िंदगी बचाता है!”
देहरादून, 12 नवंबर — जहां आमतौर पर न्याय के फैसले सुनाए जाते हैं, वहीं आज न्याय के मंदिर में मानवता की सबसे बड़ी मिसाल देखने को मिली।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने जीवनदान के इस महायज्ञ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

⚖️ अदालत में आज “न्याय नहीं, जीवनदान” हुआ
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) पहल के तहत यह रक्तदान शिविर आयोजित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वयं माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री गुहनाथन नरेंदर ने किया।
उन्होंने कहा —
“रक्तदान सबसे बड़ा मानव धर्म है। एक यूनिट रक्त किसी अजनबी की ज़िंदगी बचा सकता है — इससे बड़ा न्याय कोई नहीं।”
👩⚖️ न्यायमूर्तियों का उत्साह, अधिवक्ताओं की प्रेरणा

शिविर में माननीय न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, रविंद्र मैथानी, आलोक कुमार वर्मा, राकेश थपलियाल, पंकज पुरोहित, आशीष नैथानी, आलोक माहरा और सुभाष उपाध्याय सहित कई न्यायमूर्तियों की उपस्थिति रही।
इनमें से कई न्यायाधीशों ने स्वयं रक्तदान कर समाज को संदेश दिया कि “कानून सिर्फ सज़ा नहीं देता, दया भी सिखाता है।”
💉 44 यूनिट रक्त — कई जिंदगियों की आस
विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीम की निगरानी में आयोजित इस शिविर में कुल 44 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।
यह रक्त अब जरूरतमंद मरीजों और सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे गरीब मरीजों की ज़िंदगी बचाने में काम आएगा।
🎨 बच्चों की कला से सजा समापन
कार्यक्रम का समापन भी उतना ही प्रेरक रहा —
सायंकाल तक आठवीं कक्षा तक के छात्रों ने कला प्रतियोगिता में भाग लेकर “मानवता और सेवा” पर अपने रंग बिखेरे।
इन मासूम हाथों की पेंटिंग्स ने मानो संदेश दिया — “रंगों से ज़िंदगी बनती है, और रक्तदान से उसे बचाया जाता है।”
❤️ समाज के लिए न्याय की नई परिभाषा
उत्तराखंड उच्च न्यायालय का यह प्रयास सिर्फ एक आयोजन नहीं — न्याय को मानवता से जोड़ने की पहल है।
जहां अदालतें अक्सर “जीवन और मृत्यु” के फैसले सुनाती हैं, वहीं आज उन्होंने जीवन देने का फैसला किया।
🕊️ “कानून ने आज कर दिखाया — इंसाफ़ सिर्फ अदालत में नहीं, इंसानियत में भी मिलता है।”
