“गांधी के रास्ते पर धस्माना, कहा — आख़िरी कतार के आदमी का दुःख ही असली आज़ादी की कसौटी”
देहरादून।
भीगती सड़कों पर हर सुबह ख़बरें पहुंचाने वाले वो हाथ… आज खुद ख़बर बन गए। देहरादून में कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित “श्रमिक सम्मान सम्मेलन” में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना ने 237 न्यूज़पेपर हॉकर्स को रेनकोट भेंट कर वो इज़्ज़त दी, जो शायद बरसों से उनके हिस्से नहीं आई थी।

“असली गांधीवाद वही है, जो सबसे पीछे खड़े आदमी के आंसू पोंछ सके।”
— सूर्यकांत धस्माना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी
छोटे दुकानदारों पर बड़ा वार, मॉल्स-ऑनलाइन ने छीनी रोटियां
कार्यक्रम में धस्माना का तेवर भी गरजता रहा। उन्होंने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आज देश और प्रदेश की सत्ता पूंजीपतियों के हाथ में गिरवी है। छोटे-मंझोले व्यापारी खत्म हो रहे हैं, ऑनलाइन बाज़ार और बड़े मॉल ने उनकी रोज़ी-रोटी छीन ली है। नोटबंदी और GST ने रही-सही कमर तोड़ दी है।”
लोगों की तालियों ने साफ बता दिया कि धस्माना की बातें सीधे दिल पर लग रही थीं।
“हॉकर्स पर कोई ध्यान नहीं देता… पर कांग्रेस देगी साथ”
प्रदेश श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल ने मंच से ऐलान किया,
“हम उन हर श्रमिक के लिए लड़ेंगे, जिनका कोई संगठन नहीं, जिनकी आवाज़ कहीं नहीं सुनी जाती।”
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉक्टर जसविंदर सिंह गोगी भी बोले—
“गरीबों और वंचितों के हक की आवाज़ सिर्फ कांग्रेस उठा रही है। लड़ाई लंबी है, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।”
बरसात में भीगते, ठंड में कांपते… याद आए धस्माना
न्यूज़पेपर हॉकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित जोशी ने मंच से भावुक होकर कहा—
“जब-जब मुश्किल घड़ी आई, धस्माना जी हमारी ढाल बने। कोविड के वक्त सरकार ने हमें भुला दिया था, लेकिन इन्होंने हमें राशन और कंबल दिए।”
वहीं उपाध्यक्ष प्रदीप रतूड़ी ने याद दिलाया कि कोविड के दौरान, “सत्ता में बैठे लोगों ने हमसे मुंह फेर लिया, लेकिन धस्माना ने दो-दो बार मदद भेजी। आज रेनकोट हमारी ज़रूरत भी है और इज़्ज़त भी।”
रेनकोट में उम्मीद लिपटी है…
कार्यक्रम में जब एक-एक कर हॉकर्स को रेनकोट पहनाए गए, तो चेहरे पर सुकून था, आंखों में भरोसा। जैसे किसी ने बरसात में उनके सिर पर छत तान दी हो।
“बरसात तो हर साल आती है… पर उन हाथों का सम्मान कब होगा, जो हर सुबह हमारे दरवाज़े तक ख़बरें पहुंचाते हैं?”
