जब दादा-दादी बने गुरु और बच्चे बने श्रोता, देहरादून में सजी पीढ़ियों की पाठशाला

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🛑 BREAKING | देहरादून | 19 दिसंबर 2025

**जब दादी-नानी की कहानियाँ बनीं बच्चों की सीख…

देहरादून में दिल छू लेने वाला संवाद**

समाज कल्याण विभाग की पहल से पिघला पीढ़ियों का फासला, अनुभव से जुड़ी युवा उड़ान


आज देहरादून में एक खबर नहीं, एक एहसास जन्मा।
जहाँ उम्र और समय की दीवारें टूटीं…
और अनुभव ने भविष्य से हाथ मिलाया।

राजधानी देहरादून के प्रेम धाम वृद्ध आश्रम में
समाज कल्याण विभाग की एक अनोखी पहल ने
👉 वरिष्ठ नागरिकों और स्कूली बच्चों को एक ही मंच पर ला दिया।


अनुभव साझा संवाद: जहाँ उम्र नहीं, भावनाएँ बोलीं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में
जिला प्रशासन देहरादून द्वारा शुरू की गई
👉 “अनुभव साझा संवाद” पहल
ने वरिष्ठ और युवा पीढ़ी के बीच की दूरी को कम करने का काम किया।

34 वृद्धजनों के सामने बैठे
कार्मन रेजिडेंशियल एंड डे स्कूल के बच्चे
चुपचाप सुनते रहे—
संघर्ष, मेहनत, रिश्तों और जीवन मूल्यों की कहानियाँ।

एक बुजुर्ग की आंखें भर आईं—

“आज अपने पोते-पोतियों की कमी पूरी हो गई।”


सरकार का साथ, सम्मान के साथ

इस कार्यक्रम में
👉 भारत सरकार की अटल वयो अन्युदय योजना के तहत
👉 136 सहायक उपकरण
जैसे व्हीलचेयर, वॉकर, कान की मशीन, कमर बेल्ट
निशुल्क वितरित किए गए।

साथ ही
👉 स्वास्थ्य विभाग ने लगाया मेडिकल कैंप
👉 BP, शुगर, खून की जांच
👉 दवाइयाँ मौके पर दी गईं

यह सिर्फ कार्यक्रम नहीं—
देखभाल का भरोसा था।


“एक पेड़ मां के नाम” – भावनाओं के साथ प्रकृति का संदेश

कार्यक्रम के दौरान
वरिष्ठ नागरिकों ने
👉 मुख्यमंत्री की पहल “एक पेड़ मां के नाम” के तहत
👉 आम का पौधा रोपित किया।

एक बुजुर्ग बोले—

“जैसे हमने बच्चों को जीवन दिया,
वैसे ही धरती को हरियाली दें।”


वृद्धजनों की खुशी, बच्चों की सीख

वृद्धजनों ने खुलकर कहा—

“बच्चों से बात करके अपना बचपन लौट आया।”

प्रेम धाम वृद्धाश्रम की इंचार्ज
सिस्टर एंगिलिनी ने कहा—

“ऐसे कार्यक्रम वृद्धजनों का अकेलापन दूर करते हैं।
आज हर चेहरे पर मुस्कान थी।”


प्रशासन का संकल्प: यह सिर्फ शुरुआत है

जिला समाज कल्याण अधिकारी
दीपांकर घिल्डियाल ने बताया—

“इस संवाद से दोनों पीढ़ियाँ एक-दूसरे को समझ पाईं।
भविष्य में ऐसे कार्यक्रम लगातार होंगे।”


अंत में एक सोच…

जब अनुभव और ऊर्जा साथ चलें,
तो समाज मजबूत बनता है।

📌 **आज देहरादून ने साबित किया—
पीढ़ियों के बीच पुल बन जाए,
तो भविष्य खुद मुस्कुराने लगता है।

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